सारंगढ़। शासन एक ओर सुशासन के तहत कलेक्टर जनदर्शन, मुख्यमंत्री जनदर्शन और शिकायत पोर्टल के माध्यम से आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण करने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बिलाईगढ़ जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत डोकरीडीह का मामला प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। यहां अधोसंरचना मद से 10 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत सीसी रोड के निर्माण में कथित अनियमितता और शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार जनदर्शन में गुहार लगाने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ और उनके आवेदनों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
मामला ग्राम पंचायत डोकरीडीह में पोल्ट्री फार्म से बस्ती की ओर बनने वाली सीसी सड़क का है। ग्रामीणों के अनुसार, स्वीकृत योजना के तहत सड़क की लंबाई 262 मीटर, चौड़ाई 4 मीटर और मोटाई 7 इंच निर्धारित है। इसके निर्माण के लिए 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच श्रीमती कुंती साहू द्वारा निर्धारित मापदंडों के विपरीत महज 3 से 4 इंच मोटी कांक्रीटिंग कराई जा रही थी। जब ग्रामीणों ने स्टीमेट के अनुसार निर्माण कार्य कराने की मांग की, तो कथित तौर पर काम बंद कर दिया गया। आरोप है कि लगभग 10 से 15 मीटर सड़क का निर्माण कर कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। हालांकि, निर्माण की गुणवत्ता और वास्तविक मोटाई का आधिकारिक तकनीकी सत्यापन होना बाकी है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि सड़क निर्माण में कथित गड़बड़ी का विरोध करने पर एक युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई। इससे ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ गया है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुसार कराया जा रहा था, तो इसकी निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने में परेशानी क्यों होनी चाहिए? ग्रामीण चाहते हैं कि सड़क की वास्तविक मोटाई, गुणवत्ता और निर्माण में खर्च की गई राशि की जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
ग्रामीणों के अनुसार, मामले की शिकायत लेकर 28 जुलाई 2026 को लगभग 200 से 250 ग्रामीण कलेक्टर जनदर्शन पहुंचे थे। इसके करीब 15 दिन बाद जब वे दोबारा शिकायत करने पहुंचे, तो तत्कालीन एसडीएम प्रफुल्ल रजक ने जनदर्शन में आवेदन देने से रोकते हुए स्वयं जांच कराने का आश्वासन दिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बाद भी जांच नहीं हुई। फिर 16 सितंबर को जिला पंचायत सीईओ ने 15 दिनों के भीतर जांच कराने का आश्वासन दिया, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक, निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी उन्हें न तो जांच की स्पष्ट जानकारी मिली और न ही कोई ठोस कार्रवाई दिखाई दी।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ही शिकायत के निराकरण के लिए उन्हें 35 से 40 किलोमीटर का सफर तय कर पांच बार जनदर्शन में जाना पड़ा। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब शासन आम जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण का दावा करता है, तो फिर बार-बार शिकायत करने के बाद भी उनकी सुनवाई क्यों नहीं हो रही है? क्या आम नागरिकों को अपने अधिकारों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाना ही सुशासन है?
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, स्वीकृत स्टीमेट के अनुसार सड़क निर्माण की तकनीकी माप कराने, निर्माण कार्य में खर्च की गई राशि का सत्यापन करने और अब तक की गई शिकायतों पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि एक सरपंच के कारण सैकड़ों ग्रामीणों के मान-सम्मान और जनहित से जुड़े सवालों की अनदेखी होना न्यायसंगत नहीं है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कब तक जांच कराकर जिम्मेदारी तय करता है और ग्रामीणों को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।

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