बरमकेला। जनपद पंचायत बरमकेला में 16वें वित्त आयोग की कार्ययोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बैठक के दौरान भाजपा समर्थित 10 सदस्यों के बाहर चले जाने के बाद मौजूद सदस्यों के बहुमत से कार्ययोजना का प्रस्ताव पारित किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामले को लेकर जनपद अध्यक्ष डॉ. विद्या किशोर चौहान के नाम से वित्त मंत्री ओपी चौधरी के समक्ष शिकायत किए जाने की भी चर्चा है।
विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि कार्ययोजना पर सदस्यों को आपत्ति थी, तो बैठक में बिंदुवार विरोध दर्ज कराने के बजाय बैठक से बाहर जाने का निर्णय क्यों लिया गया? वहीं कुछ सदस्यों द्वारा अपने क्षेत्र के बजाय अन्य क्षेत्रों की पंचायतों में राशि प्रस्तावित किए जाने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि इससे संबंधित क्षेत्रों के विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि कमीशन के खेल से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसकी जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पहले भी कोरम को लेकर उठा था विवाद
जनपद पंचायत की बैठकों को लेकर इससे पहले भी विवाद सामने आ चुका है। आरोप लगाया गया था कि कुछ सदस्यों की अनुपस्थिति के कारण बैठकों में कोरम पूरा नहीं हो पा रहा था। वहीं तीन सदस्यों के लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहने के मामले में नियमानुसार कोई कार्रवाई हुई या नहीं, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब इन तमाम बिंदुओं को लेकर जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज हो गई है।
सीईओ की भूमिका पर भी सवाल
पूरे मामले में जनपद पंचायत के सीईओ की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मांग की जा रही है कि 16वें वित्त आयोग की पूरी कार्ययोजना, बैठक में सदस्यों की उपस्थिति, प्रस्तावों के समर्थन-विरोध, बहिष्कार की स्थिति और पारित प्रस्ताव की प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।
वहीं वित्त मंत्री ओपी चौधरी की ओर से सभी को मिलकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की बात कही गई है। ऐसे में अब जनता के बीच सवाल है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता क्षेत्र का विकास होना चाहिए या आपसी राजनीतिक खींचतान? लोगों ने पूरी कार्ययोजना के साथ क्षेत्रवार स्वीकृत कार्यों और राशि की सूची सार्वजनिक करने की मांग की है।
इन क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित हुई राशि
उपलब्ध जानकारी के अनुसार कार्ययोजना में विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग राशि प्रस्तावित की गई है। इसमें आनंद लुकापारा 2.50 लाख, ठेंगागुड़ी 2 लाख, सांकरा 2 लाख, विश्वदेव भोई पूरेनपाली 4 लाख, डोंगरीपाली 2.50 लाख, अनिता प्रधान भठली 2 लाख, सुरसी 2.50 लाख और पोरथ 2 लाख रुपये शामिल हैं।
इसी तरह तुलसी पटेल शकरतुंगा 2.40 लाख, धौरादरहा 2 लाख, बीजामाला 2 लाख, लक्ष्मी चरण सिदार झाल 2.20 लाख, हट्टापाली 2.20 लाख तथा छेलभांठा-तरकेला के लिए 2 लाख रुपये प्रस्तावित बताए गए हैं।
वहीं राधा सिदार डभरा 6.40 लाख, कौशल्या नायक बार 6.20 लाख, रजनी एक्का डभरा 2.40 लाख, पिपरखुंटा 2 लाख और छेलभांठा 2 लाख रुपये की राशि प्रस्तावित होने की जानकारी सामने आई है।
इसके अलावा चंदा मिरि गोबरसिंहा 5.20 लाख, कटंगपाली 60 हजार, मूंगलीपाली 60 हजार, गणेशी चौहान नावापाली 1 लाख, सिंघारी 2 लाख, बोरे 1 लाख, डुमरपाली 2.40 लाख तथा दीपमाला जांगड़े कंडोला 4 लाख और जलगढ़ 2.40 लाख रुपये प्रस्तावित बताए गए हैं।
अब सबसे अहम सवाल यही है कि इन प्रस्तावों का आधार क्या रहा, क्षेत्रवार प्राथमिकताएं कैसे तय की गईं और क्या सभी सदस्यों को कार्ययोजना पर समान रूप से अपनी बात रखने का अवसर मिला? कार्ययोजना और बैठक की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक होने के बाद ही पूरे विवाद की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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