श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी 2026 का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखा जाएगा. ये व्रत संतान प्राप्ति, संतान की उन्नति और उनकी लंबी उम्र की कामना के लिए रखा जाता है

इस दिन भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव की भी पूजा की जाती है. अगर आप पहली बार पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने जा रहे हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही हो सकता है कि व्रत निर्जला रखें, सिर्फ जल ग्रहण करें या फलाहार करें. लेकिन कंफ्यूज होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इस गाइड में आपको अपने सारे सवालों के जवाब एक साथ मिल जाएंगे.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार रखा जा सकता है. इसलिए पहली बार व्रत रखने वालों को बिना तैयारी के निर्जला व्रत रखने की जरूरत नहीं है. आप अपनी सामर्थ्य के अनुसार निर्जला या फलाहारी (जल और फल के साथ) व्रत रख सकते हैं. यहां जानिए पुत्रदा एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त, व्रत के नियम, क्या खाएं-क्या न खाएं और अगले दिन किस तरह व्रत का पारण करें, ताकि व्रत को लेकर कोई कंफ्यूजन न रहे.
पुत्रदा एकादशी का शुभ मुहूर्त क्या है?
एकादशी शुरू: 23 अगस्त 2026 को सुबह 2:01 से
एकादशी समाप्त: 24 अगस्त 2026 को सुबह 4:19 तक
पूजा का समय: 23 अगस्त को सुबह 7:32 से दोपहर 12:24 तक
पारण का समय: 24 अगस्त 2026 को दोपहर 1:41 से शाम 4:16 बजे तक
पुत्रदा एकादशी का क्या महत्व है?
हिंदू धर्म में पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति, संतान की उन्नति और परिवार की सुख-शांति के लिए रखा जाता है. ये साल में दो बार – पौष मास और श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में आती है. इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और पापों से मुक्ति मिलती है.
संतान सुख:- निसंतान दंपत्तियों के लिए यह व्रत संतान प्राप्ति का वरदान देने वाला माना गया है.
कल्याण:- संतान के जीवन की रक्षा, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए माता-पिता ये व्रत करते हैं.
मोक्ष प्राप्ति:- इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को अंत में विष्णु धाम की प्राप्ति होती है और सभी पाप नष्ट होते हैं.
पुत्रदा एकादशी व्रत में खाना चाहिए?
ताजे फल: केला, सेब, अनार, अंगूर और पपीता.
ड्राई फ्रूट्स: बादाम, काजू, किशमिश, मखाना और अखरोट.
दूध से बनी चीजें: सादा दूध, दही, पनीर और छाछ.
व्रत की सब्जियां: आलू, शकरकंद, कद्दू (घिया) और टमाटर.
व्रत का आटा: कुट्टू, सिंघाड़ा या सामा के चावल.
पुत्रदा एकादशी व्रत में क्या न खाएं (वर्जित चीजें)
चावल, गेहूं, जौ और किसी भी प्रकार की दाल.
साधारण नमक (इसकी जगह सेंधा नमक लें).
प्याज और लहसुन.
मांस, मछली या अंडा.
पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने के क्या नियम हैं?
व्रत के दिन अनाज या चावल खाना मना है.
अपनी क्षमता के अनुसार निर्जला या जल पीकर व्रत रखें.
भगवान विष्णु को भोग में तुलसी दल जरूर रखें.
एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए.
एकादशी व्रत में बाल या नाखून नहीं काटने चाहिए.
मन में अच्छे विचार रखें, झूठ न बोलें और किसी का बुरा न सोचें.
पहली बार व्रत रख रहे हैं तो ऐसे करें तैयारी
अगर आप पहली बार पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने जा रहे हैं, तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत का संकल्प लें. निर्जला व्रत कठिन लगता है तो फलाहार या जल ग्रहण करके व्रत रखा जा सकता है. व्रत के दौरान अन्न, चावल, गेहूं और दाल का सेवन न करें. पूजा-पाठ के साथ मन को शांत और सात्विक रखें. व्रत का उद्देश्य केवल भूखा रहना नहीं, बल्कि भगवान विष्णु की भक्ति, संयम और सात्विक आचरण भी माना जाता है.
पुत्रदा एकादशी का उपवास कैसे करें?
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ पीले वस्त्र पहनें.
हाथ में जल लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें.
भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल का गंगाजल व दूध से अभिषेक करें.
भगवान को रोली, चंदन, कलावा, तुलसी दल, चंदन और पीले फल-फूल चढ़ाएं.
भोग लगाएं (ध्यान रखें कि एकादशी पर चावल का प्रयोग वर्जित है).
सामर्थ्य के अनुसार पूरे दिन का व्रत रखें या केवल फलाहार करें.
‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें.
पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें.
अंत में गणेश जी और श्री हरि विष्णु की आरती करें.
शाम को दोबारा दीपक जलाकर भगवान की आरती करें और फलाहार का भोग लगाएं.
तुलसी जी के पास बैठकर ध्यान करें.
रात में भगवान के भजन-कीर्तन करें.
अगले दिन द्वादशी तिथि पर शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण (व्रत खोलना) करें.
पारण करने से पहले ब्राह्मणों या गरीबों को भोजन कराएं.
अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र या दूध का दान करें.
पुत्रदा एकादशी का व्रत क्या खाकर खोलना चाहिए?
एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि पर सूर्योदय के बाद पारण (व्रत खोलने) का नियम है. व्रत को हमेशा तुलसी दल (पत्ते) और गंगाजल मुंह में डालकर खोलना चाहिए. इसके बाद सात्विक भोजन जैसे कि हल्का अन्न, फल, मूंग की दाल या चावल (परंपरा अनुसार) ग्रहण करना चाहिए.
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