प्रेग्नेंसी की खबर मिलती है, जिंदगी पूरी तरह बदलने लगती है। हर मां चाहती है कि उसका होने वाला बच्चा स्वस्थ रहे, लेकिन कई बार अनजाने में की गई छोटी-छोटी गलतियां भी गर्भावस्था पर असर डाल सकती हैं।
खासकर शुरुआती तीन महीने सबसे ज्यादा सेंसेटिव माने जाते हैं, क्योंकि इसी समय बच्चे का विकास तेजी से शुरू होता है। ऐसे में खानपान, दवाइयों और रोजमर्रा की आदतों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। डॉक्टर वैदेही मराठे ने कुछ ऐसी आम गलतियों के बारे में बताया है, जिनसे शुरुआती प्रेग्नेंसी में बचना चाहिए। आइए जानते हैं वे कौन-सी बातें हैं।
- शराब का सेवन बिल्कुल ना करें
गर्भावस्था के दौरान शराब पीना बच्चे के विकास पर बुरा असर डाल सकता है। यह उसके मस्तिष्क और शरीर के सामान्य विकास में रुकावट पैदा कर सकता है। इसलिए प्रेग्नेंसी कंफर्म होते ही शराब से पूरी तरह दूरी बना लेना सबसे सुरक्षित माना जाता है।
- धूम्रपान या धुएं वाले किसी भी उत्पाद से बचें
सिगरेट, बीड़ी या धुएं वाले किसी भी दूसरे उत्पाद का इस्तेमाल मां और शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अगर आपके आसपास कोई धूम्रपान करता है, तो उसके धुएं से भी दूरी बनाकर रखें।
- चाय और कॉफी का सेवन सीमित रखें
बहुत ज्यादा चाय, कॉफी या ऐसे पेय जिनमें उत्तेजक पदार्थ अधिक हो, उनका ज्यादा सेवन गर्भावस्था में ठीक नहीं माना जाता। डॉक्टर वैदेही मराठे के अनुसार, पूरे दिन में इसकी मात्रा दो सौ मिलीग्राम से कम रखना बेहतर होता है।
- कुछ खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं
शुरुआती प्रेग्नेंसी में कच्चा या अधपका मांस, बिना उबाला या बिना अच्छी तरह तैयार किया गया दूध और दूध से बने उत्पाद, साथ ही बिना धोए फल और सब्जियां खाने से बचना चाहिए। इनमें संक्रमण का खतरा हो सकता है, जो मां और शिशु दोनों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है।
- बिना डॉक्टर की सलाह के दवा या जड़ी-बूटी ना लें
सिरदर्द, सर्दी या किसी भी दूसरी परेशानी में अपनी मर्जी से दवा लेना ठीक नहीं है। इसी तरह किसी भी तरह की जड़ी-बूटी, काढ़ा या पूरक भी बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेना चाहिए। हर दवा गर्भावस्था में सुरक्षित नहीं होती।
कच्चे पपीते को लेकर क्या कहती हैं डॉक्टर?
प्रेग्नेंसी में कच्चे पपीते को लेकर अक्सर सवाल पूछे जाते हैं। डॉक्टर वैदेही मराठे के अनुसार, कच्चे पपीते में एक ऐसा तत्व पाया जाता है, जो अधिक मात्रा में लेने पर गर्भाशय में सिकुड़न बढ़ा सकता है। एहतियात के तौर पर गर्भावस्था में कच्चा पपीता ना खाने की सलाह दी जाती है। वहीं, अच्छी तरह पका हुआ पपीता सीमित मात्रा में खाना सामान्य रूप से सुरक्षित माना जाता है।
इन बातों का भी रखें ध्यान
समय पर डॉक्टर से जांच कराते रहें। संतुलित और पौष्टिक भोजन लें, पर्याप्त पानी पिएं और भरपूर आराम करें। इसके अलावा किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
- नियमितीकरण की मांग पर गरजीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं, सौंपा ज्ञापन… - October 27, 2026
- अवैध खनिज परिवहन पर प्रशासन का शिकंजा, 5 वाहन पकड़े… - October 27, 2026
- बैकयार्ड कुक्कुट योजना से बढ़ेगी ग्रामीणों की आय, 150 इकाइयों का वितरण… - October 27, 2026
