सारंगढ़-बिलाईगढ़, 23 जुलाई 2026। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘रामनामी’ को ‘सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म’ श्रेणी में नॉमिनेशन मिलने से पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर रामनामी समुदाय में खुशी और गर्व का माहौल है। इस उपलब्धि ने प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति और भगवान श्रीराम के प्रति अटूट आस्था की विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
डॉक्यूमेंट्री का निर्देशन प्रसिद्ध फिल्मकार भरतबाला गणपति ने किया है। फिल्म के निर्माण से जुड़े संपूर्ण दल ने रामनामी समाज की अनूठी परंपराओं, आध्यात्मिक जीवन, सादगी और सांस्कृतिक विरासत को बेहद संवेदनशील और प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा है। इस राष्ट्रीय सम्मान के नॉमिनेशन से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊंचाई मिली है।
बिलासपुर संभाग के सारंगढ़-बिलाईगढ़, सक्ती, जांजगीर-चांपा सहित कई जिलों में बड़ी संख्या में रामनामी समाज के लोग निवास करते हैं। यह समाज भगवान श्रीराम के प्रति अखंड श्रद्धा, समरसता, सादगीपूर्ण जीवन और लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए पूरे देश में अपनी अलग पहचान रखता है। शरीर पर श्रीराम नाम अंकित कराने की अनूठी परंपरा रामनामी समाज की सबसे विशिष्ट पहचान मानी जाती है, जो भक्ति, समानता और आध्यात्मिक जीवन का प्रेरणादायी संदेश देती है।
डॉक्यूमेंट्री ‘रामनामी’ ने इस समाज की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और जीवन मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में मिला यह नॉमिनेशन न केवल रामनामी समाज, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक अस्मिता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा मिलने की उम्मीद है।





