बिलाईगढ़। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बिलाईगढ़ नगर पंचायत से सामने आए चर्चित मामले में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सुशील चौधरी को बड़ी राहत मिली है। स्वच्छता कार्य में लापरवाही के चलते कार्य से पृथक किए गए प्रेरणा स्वच्छता समूह की कुछ महिलाओं द्वारा लगाए गए उत्पीड़न और अभद्र व्यवहार के आरोपों को प्रशासनिक जांच और छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने निराधार एवं असत्य पाया है। विस्तृत जांच के बाद आयोग ने पूरे प्रकरण को नस्तीबद्ध (बंद) कर दिया।
जांच रिपोर्ट के अनुसार संबंधित स्वच्छता समूह द्वारा कार्य में लगातार अनुशासनहीनता बरती जा रही थी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा था और बार-बार समझाइश के बावजूद कार्य में सुधार नहीं हुआ। इतना ही नहीं, भारत सरकार के महत्वपूर्ण ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ से ठीक चार दिन पहले समूह ने बिना पूर्व सूचना के नगर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह बंद कर दी, जिससे नगर पंचायत की व्यवस्था प्रभावित हुई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर पंचायत प्रशासन ने 5 मार्च 2025 को विधिवत नोटिस जारी कर मुनादी कराई और संबंधित समूह को अनुबंधित कार्य से पृथक करते हुए सफाई व्यवस्था की निरंतरता बनाए रखने के लिए नया स्वच्छता समूह ‘जय मां समलाई’ को कार्य सौंप दिया।
जांच में यह भी सामने आया कि कार्य से हटाए जाने के लगभग सात दिन बाद महिलाओं ने सीएमओ पर गंभीर आरोप लगाए। शिकायत में गाली-गलौज, अभद्र व्यवहार और अन्य गंभीर आरोप लगाए गए, लेकिन एसडीएम बिलाईगढ़ की जांच में इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि शिकायत का उद्देश्य निष्कासित कार्य को पुनः प्राप्त करने के लिए दबाव बनाना था।
मिशन क्लीन सिटी के जिला समन्वयक शुभम नायक तथा सफाई दरोगा बहादुर कहार सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान में भी यह स्पष्ट किया गया कि सीएमओ द्वारा कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाता था तथा शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले।
इसके बाद मामला छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग पहुंचा। 6 जुलाई 2026 को आयोग की अध्यक्ष श्रीमती किरणमयी नायक की अध्यक्षता में हुई सुनवाई में आयोग ने कलेक्टर एवं एसडीएम की जांच रिपोर्ट का परीक्षण किया। आयोग ने पाया कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं हैं और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उन्हें निराधार माना गया। आयोग ने यह भी माना कि शिकायत बार-बार बाहरी प्रभाव में की जा रही थी।
सभी तथ्यों और जांच रिपोर्टों के आधार पर छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने सीएमओ सुशील चौधरी के विरुद्ध लगाए गए सभी आरोपों को असत्य एवं बेबुनियाद मानते हुए प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया। इस निर्णय के साथ लंबे समय से चर्चा में रहे इस मामले का पटाक्षेप हो गया।

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