सारंगढ़-बिलाईगढ़। लोकतंत्र में सत्ता का सुख भोगना आसान है, लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब नेतृत्व विपक्ष की बेंच पर बैठा हो। राजनीति के इसी कड़े इम्तिहान में सारंगढ़ की विधायक श्रीमती उत्तरी गणपत जांगड़े आज छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक मिसाल बनकर उभरी हैं। वर्तमान में सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद जहाँ कई दिग्गज नेता और सूरमा राजनीतिकy परिदृश्य से शांत या निष्क्रिय नजर आ रहे हैं, वहीं उत्तरी जांगड़े की सक्रियता ग्राफ दिन-ब-दिन और ऊपर चढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि आज वे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की सबसे लोकप्रिय, सहज और सर्वमान्य जननेता के रूप में स्थापित हो चुकी हैं।

पद से बड़ा जनता का भरोसा-
स्थानीय राजनीतिक जानकारों और क्षेत्र की जनता का साफ कहना है कि उत्तरी जांगड़े के लिए पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण जनता की सेवा है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ को पृथक जिला बनवाने की ऐतिहासिक लड़ाई में उनकी मुख्य भूमिका को आज भी हर नागरिक याद करता है। जिला बनने के बाद से लेकर आज विपक्ष के दौर में भी, क्षेत्र का ऐसा कोई छोटा-बड़ा सामाजिक, सांस्कृतिक या प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं होता, जहाँ विधायक अपनी उपस्थिति दर्ज न कराती हों। आधी रात को भी यदि क्षेत्र की जनता को उनकी जरूरत होती है, तो वे सीधे जमीन पर उतरकर खड़ी हो जाती हैं। यही आत्मीय जुड़ाव उन्हें अन्य नेताओं से अलग और बेहद खास बनाता है।
कांग्रेस के ‘जीत की हैट्रिक’ का आधार-
राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि विधायक उत्तरी जांगड़े की कार्यशैली बेहद मिलनसार और सहज है। वे सिर्फ आम जनता की ही नहीं, बल्कि कांग्रेस संगठन के छोटे से छोटे कार्यकर्ता की भी उतनी ही सुध लेती हैं। चाहे जनपद पंचायत के चुनाव हों, नगर पालिका के हों या फिर ग्रामीण अंचलों के पंचायत चुनाव—हर मोर्चे पर वे खुद कमान संभालती हैं। संगठन में उनके इस कुशल नेतृत्व क्षमता के कारण आज पूरा जिला कांग्रेस परिवार एक सूत्र में बंधा हुआ है। विश्लेषकों की मानें तो वर्तमान में उनकी यह अभूतपूर्व सक्रियता आगामी विधानसभा चुनाव में उनके ‘जीत की हैट्रिक’ (लगातार तीसरी जीत) की संभावनाओं को सबसे मजबूत आधार दे रही है।
सारंगढ़ मे संघर्ष का दूसरा नाम-
उत्तरी जांगड़े की पहचान एक ऐसे जुझारू नेता की है जो जनता के हक के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। पिछले दिनों सारंगढ़ और कोसीर क्षेत्र में चरमराई बिजली व्यवस्था को लेकर उन्होंने जिस तरह बिजली विभाग और प्रशासन को सीधे चेतावनी दी और आंदोलन का बिगुल फूंका, उसने सरकार को भी सोचने पर मजबूर कर दिया।
सड़क से सदन तक गूंज: क्षेत्र में बहुप्रतीक्षित रेल लाइन निर्माण का मुद्दा हो, किसानों के लिए धान टोकन की समस्या हो, या फिर ग्रामीण अंचलों में बुनियादी सुविधाएं—उत्तरी जांगड़े ने हर विषय को विधानसभा (सदन) के पटल पर बेहद प्रखरता से रखा है।
विपरीत लहर में भी दर्ज की थी जीत-
याद रहे कि साल 2023 के विधानसभा चुनाव में जब पूरे प्रदेश में कांग्रेस के खिलाफ एक माहौल बना हुआ था, तब भी सारंगढ़ की जनता ने उत्तरी जांगड़े के पांच साल के ऐतिहासिक विकास कार्यों और उनकी साफ-सुथरी छवि पर भरोसा जताते हुए उन्हें दोबारा भारी मतों से विजयी बनाया था।
आगामी ढाई साल निर्णायक, जिले की राजनीति में बढ़ा कौतूहल
राजनीतिक पंडितों के अनुसार, मौजूदा कार्यकाल के आने वाले ढाई साल क्षेत्र के विकास और राजनीति के लिहाज से बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं। प्रदेश में भले ही वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार काबिज हो, लेकिन सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की दोनों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस विधायकों की मजबूत पकड़ और संगठन की अभेद्य एकजुटता ने सत्ता पक्ष के पसीने छुड़ा रखे हैं। ऐसे में, जैसे-जैसे समय आगे बढ़ रहा है, क्षेत्र की राजनीति और भी दिलचस्प होती जा रही है। लेकिन एक बात पूरी तरह साफ है—जनता के सुख-दुख में चौबीसों घंटे खड़े रहने वाली विधायक उत्तरी जांगड़े आज लोकप्रियता के उस शिखर पर हैं, जहाँ उन्हें हिला पाना विपक्षियों के लिए एक बेहद टेढ़ी खीर साबित होने वाला है।


