सारंगढ़। शासकीय विद्यालयों में प्रार्थना एवं नैतिक मूल्यों से जुड़े मंत्रों के पाठ को संविधान विरोधी बताने वाले बयान पर भाजपा जिलाध्यक्ष ज्योतिलाल पटेल ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति, संस्कार और नैतिक शिक्षा को धर्म विशेष का चश्मा लगाकर देखना दुर्भाग्यपूर्ण एवं भ्रामक है।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों में बच्चों को अनुशासन, नैतिकता, राष्ट्रभक्ति, बड़ों के सम्मान और मानव कल्याण की भावना सिखाने के उद्देश्य से प्रार्थनाएं एवं प्रेरणादायक श्लोक पढ़ाए जाते हैं। इन्हें किसी धर्म विशेष का प्रचार बताना भारतीय परंपरा और शिक्षा व्यवस्था की गलत व्याख्या है।
ज्योतिलाल पटेल ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को अपनी आस्था के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता देता है, वहीं भारतीय संस्कृति के श्रेष्ठ विचारों को आत्मसात करने से किसी को नहीं रोकता। “सर्वे भवन्तु सुखिनः”, “असतो मा सद्गमय” जैसे मंत्र सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का संदेश देते हैं, न कि किसी एक धर्म का।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके कुछ नेता तुष्टिकरण की राजनीति के तहत भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं पर लगातार प्रश्नचिन्ह खड़े करने का प्रयास करते रहे हैं। देश की नई शिक्षा नीति भी भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की बात करती है।
भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि यदि विद्यालयों में बच्चों को अच्छे संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण की शिक्षा दी जा रही है, तो उसका स्वागत होना चाहिए, न कि राजनीतिक लाभ के लिए विवाद खड़ा किया जाना चाहिए।
अंत में उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वधर्म समभाव” का संदेश देती है। इसलिए समाज को बांटने वाले बयानों से बचते हुए शिक्षा और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

- भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों को धर्म विशेष से जोड़कर देखना दुर्भाग्यपूर्ण – ज्योति पटेल - June 22, 2026
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