भटगांव। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में अब महज कुछ दिन शेष हैं और 16 जून से प्रदेशभर के स्कूल खुलने जा रहे हैं, लेकिन स्कूली बच्चों की किताबों का अब तक कोई ठोस इंतजाम नहीं हो पाया है। इसे लेकर शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। अभिभावकों, विद्यार्थियों और निजी स्कूल संचालकों में चिंता का माहौल है।
प्रदेश में पहली से आठवीं कक्षा तक सभी सरकारी और निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य कर दी गई हैं। सरकार के इस निर्णय का स्वागत तो हुआ, लेकिन लाखों विद्यार्थियों तक समय पर किताबें पहुंचाने की व्यवस्था धरातल पर नजर नहीं आ रही है। स्कूल खुलने की तारीख तय हो चुकी है, लेकिन किताबें कब तक पहुंचेंगी, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं है।
जानकारी के अनुसार पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा सरकारी स्कूलों में किताबें पहुंचाने का कार्य शुरू किया गया है, लेकिन अभी भी कई संकुलों और विद्यालयों तक पुस्तकें नहीं पहुंच सकी हैं। दूसरी ओर निजी स्कूलों की स्थिति और भी चिंताजनक बनी हुई है। निजी स्कूल संचालकों को न तो पुस्तकों के वितरण का शेड्यूल मिला है और न ही यह बताया गया है कि उन्हें किताबें कब उपलब्ध कराई जाएंगी।
ऐसे में स्कूल खुलते ही विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। बिना पुस्तकों के शिक्षण कार्य शुरू करना स्कूलों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अभिभावकों का कहना है कि सरकार ने नई व्यवस्था तो लागू कर दी, लेकिन उसके अनुरूप तैयारी नहीं की गई, जिसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ सकता है।
इस मुद्दे पर कांग्रेस के पूर्व नगर पंचायत उपाध्यक्ष प्रवेश दुबे ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने शासन से मांग की है कि सभी सरकारी और निजी स्कूलों में तत्काल किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए।
स्कूल खुलने की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। ऐसे में विद्यार्थियों के हाथों में समय पर किताबें पहुंचाना शासन और संबंधित विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। यदि जल्द व्यवस्था नहीं बनी तो नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत अव्यवस्था और परेशानी के बीच होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।


