सारंगढ़/रायपुर। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के कार्यों में उनके पति या अन्य परिजनों का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विभाग ने कहा है कि पंचायतों में महिलाओं को दिया गया आरक्षण केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि उन्हें निर्णय प्रक्रिया में स्वतंत्र, सक्षम और प्रभावी भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करना इसका मूल उद्देश्य है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए सभी ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत की बैठकों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
नए आदेश के तहत किसी भी महिला सरपंच, पंच या अन्य निर्वाचित महिला प्रतिनिधि के स्थान पर उनके पति, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति को बैठक में शामिल होने अथवा निर्णय लेने की अनुमति नहीं होगी। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नियमों की अनदेखी या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित मामलों में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर भी जोर दिया है। आवश्यकता पड़ने पर बैठकों में उपस्थित जनप्रतिनिधियों की पहचान और उपस्थिति की पुष्टि के लिए फेस रिकॉग्निशन तथा बायोमीट्रिक अटेंडेंस जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा सकती हैं।
विभाग के इस फैसले को पंचायतों में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे महिला जनप्रतिनिधियों को स्वतंत्र रूप से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने और ग्रामीण विकास से जुड़े निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।

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