सरकारी बिजली कंपनी CSPDCL में वायरल हुए घूसकांड ने पूरे सिस्टम को हिला दिया है। रायपुर के गुढ़ियारी स्थित प्रोजेक्ट ऑफिस में पदस्थ कार्यपालन अभियंता मुरली मौर्या का जैसे ही ठेकेदार से नोट लेते हुए वीडियो सामने आया, साहब पर गाज गिर गई।

अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक मौर्या को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
वीडियो वायरल होने के कुछ घंटों के भीतर हुई कार्रवाई ने पूरे विभाग में हड़कंप मचा दिया है।

साहब के बगल में कैश काउंटर
पूरा मामला रायपुर के गुढ़ियारी स्थित CSPDCL मुख्य अभियंता प्रोजेक्ट कार्यालय का है। वीडियो में दिखाई दे रहे अधिकारी की पहचान मुरली मौर्या के रूप में हुई है। वे यहां कार्यपालन अभियंता के पद पर तैनात थे और विभाग में उन्हें बेहद रसूखदार अधिकारी माना जाता था।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह पूरा खेल आखिर किसके संरक्षण में चल रहा था? क्योंकि जिस केबिन में नोटों का लेन-देन हो रहा था, वह सीधे चीफ इंजीनियर के कमरे से सटा हुआ बताया जा रहा है। यानी बड़े अफसरों के नाक के नीचे ठेकेदारों से खुलेआम रकम वसूली जा रही थी।
ठेकेदार आया, नोट रखे
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने बिजली कंपनी के अंदर चल रहे कथित कमीशन तंत्र की परतें खोल दी हैं। दावा है कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति बिलासपुर की एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी का ठेकेदार है। आरोप है कि नए काम दिलाने और पुराने बिल क्लियर कराने के बदले उससे मोटी रकम ली जा रही थी।वीडियो में यह भी दिख रहा है कि ठेकेदार केबिन में पैसा देता है। फिर वहीं मौजूद दो प्लेसमेंट कर्मचारियों को भी रकम बांटी जाती है। इसके बाद एक हिस्सा दूसरे अफसर तक पहुंचने की चर्चा भी विभाग में तेज हो गई है।
चुनावी चंदा का दबाव
वीडियो सामने आने के बाद अब सबसे विस्फोटक दावा ठेकेदारों और सप्लायरों की तरफ से किया जा रहा है। विभाग के लोगों का आरोप है कि मुरली मौर्या अक्सर वे पैसे लेते वक्त कहते थे कि बड़े साहब को चुनाव लड़ना है, इसलिए फंड इकट्ठा करना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि साहब की मैडम भी कोरबा और आसपास के इलाकों में लगातार सक्रिय हैं। ठेकेदारों के मुताबिक यह भी कहा जाता था कि अभी मदद कर दो… साहब विधायक बन गए तो आगे और फायदा मिलेगा। यानी विभागीय टेंडर और बिल पास कराने के नाम पर कथित तौर पर “चुनावी फंड” जुटाने का खेल चल रहा था।
ट्रांसफर आदेश भी बेअसर
मुरली मौर्या का नाम पहली बार विवादों में नहीं आया। इससे पहले भी मेसर्स बजरंग इलेक्ट्रिकल के सबस्टेशन टेंडर मामले में उन पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। जांच समिति ने उन्हें दोषी भी माना था। इसके बाद उनका तबादला सुदूर पखांजूर कर दिया गया था। लेकिन विभाग में चर्चा है कि रसूख इतना मजबूत था कि वे रायपुर से कार्यमुक्त ही नहीं हुए। आदेश जारी हुआ, लेकिन साहब राजधानी में ही जमे रहे।
इसी मामले में तत्कालीन मुख्य अभियंता राजेंद्र प्रसाद को हटाकर डंगनिया की लूप लाइन में भेज दिया गया था। विभाग के भीतर अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसके संरक्षण में मौर्या लगातार बचते रहे?
करोड़ों की खरीदी और कमीशन का आरोप
विभागीय सूत्रों का दावा है कि मौर्या को बिजली सप्लाई से जुड़े करोड़ों रुपए के सामान की खरीदी की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें तार, खंभे और दूसरे महंगे उपकरण शामिल थे।आरोप है कि सप्लायरों से मोटा कमीशन लेकर घटिया सामग्री की सप्लाई कराई जाती थी। विभाग में यह चर्चा भी आम है कि गर्मियों में ट्रांसफार्मर फुंकना, तार जलना और उपकरण खराब होना इसी भ्रष्ट सिस्टम का नतीजा है।
पांच बड़े सवाल जो अब उठ रहे
क्या चुनावी फंड के नाम पर वसूली होती थी?
वीडियो में दिख रहे बाकी लोग कौन हैं?
क्या रकम ऊपर तक पहुंचाई जाती थी?
ट्रांसफर आदेश के बावजूद मौर्या रायपुर में कैसे जमे रहे?
क्या सिर्फ सस्पेंशन होगा या पूरी जांच भी होगी?
सस्पेंशन, खत्म नहीं हुआ मामला
विभाग में यह चर्चा तेज है कि मामला सिर्फ एक इंजीनियर का नहीं है। वायरल वीडियो ने उस सिस्टम की पोल खोल दी है, जहां टेंडर, बिल, पोस्टिंग और राजनीतिक पहुंच सब एक ही धागे में बंधे नजर आ रहे हैं। अब सबकी निगाह इस बात पर है कि सरकार सिर्फ एक अधिकारी पर कार्रवाई कर मामला शांत करती है या फिर पूरे नेटवर्क की जांच होती है।
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