सारंगढ़। सारंगढ़ वासियों के दो सबसे बड़े सपने वर्षों से चर्चा और संघर्ष का विषय रहे हैं—पहला सारंगढ़ को जिला बनाना और दूसरा सारंगढ़ में रेलवे लाइन एवं रेलवे स्टेशन की सौगात दिलाना। पहला सपना तो पूरा हो गया, जब सारंगढ़ को जिले का दर्जा मिला और क्षेत्रवासियों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई। लेकिन अब हर जुबान पर एक ही सवाल है—क्या डबल इंजन की सरकार सारंगढ़ को रेलवे लाइन की सौगात दे पाएगी?
सारंगढ़ में रेलवे लाइन की मांग कोई नई नहीं है। यह मांग दशकों पुरानी है और इसके पीछे कई लोगों का संघर्ष, उम्मीद और भावनाएं जुड़ी हुई हैं। इन्हीं संघर्षशील लोगों में एक नाम था सारंगढ़ के जाने-माने पेंटर और स्वर्गीय किशोर कुमार के बड़े प्रशंसक भगत गुप्ता का, जिन्होंने अपना पूरा जीवन सारंगढ़ में रेलवे लाइन की मांग को लेकर पत्राचार, दस्तावेज और आवेदन तैयार करने में लगा दिया।
बताया जाता है कि एक दिन भगत गुप्ता कागजों और दस्तावेजों से भरा बैग लेकर सारंगढ़ के प्रसिद्ध अधिवक्ता एवं वर्तमान जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष विजय कुमार तिवारी के पास पहुंचे। दुखी मन से उन्होंने कहा—
“महराज जी, देखिए ये सारे दस्तावेज रेलवे लाइन से जुड़े हैं। नेताओं की घोषणाएं, शासन के आदेश और पुराने पत्र… क्या इनके आधार पर हम न्यायालय में याचिका दायर कर सकते हैं?”
इस पर अधिवक्ता विजय तिवारी ने उन्हें समझाते हुए कहा कि न्यायालय अंतिम रास्ता है। पहले क्षेत्र के विधायक, सांसद और मंत्रियों से मिलकर इस मांग को पूरा करवाने का प्रयास करना चाहिए। लेकिन भगत गुप्ता का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने कहा—
“थक गया हूं महराज जी… बलौदाबाजार से सारंगढ़ होते हुए झारसुगुड़ा तक रेल मार्ग का प्रस्ताव बजट में आया था, लेकिन अब इसे स्थगित बताया जा रहा है।”
भगत गुप्ता वर्षों से रेलवे लाइन के लिए आवेदन और पत्राचार करते रहे। उनका मानना था कि सारंगढ़ जैसे विकसित हो रहे क्षेत्र को रेलवे सुविधा मिलनी ही चाहिए। उस दौर में नेताओं द्वारा जवाब में अक्सर यही कहा जाता था कि “विकास के लिए डबल इंजन की सरकार जरूरी है।”
आज भले ही भगत गुप्ता इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन प्रदेश में डबल इंजन की सरकार मौजूद है। ऐसे में अब लोगों की निगाहें सरकार और विशेष रूप से सारंगढ़ क्षेत्र से जुड़े प्रदेश के पूर्व सांसद एवं वर्तमान मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai पर टिकी हुई हैं। क्षेत्रवासियों का मानना है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो सारंगढ़ में रेलवे लाइन का सपना हकीकत बन सकता है।
सारंगढ़ जिले के गठन के बाद विकास की नई संभावनाएं खुली हैं। प्रशासनिक ढांचा मजबूत हुआ है, नए कार्यालय बने हैं और क्षेत्रीय पहचान भी बढ़ी है। अब रेलवे लाइन को विकास की अगली बड़ी कड़ी माना जा रहा है। व्यापार, शिक्षा, रोजगार और आवागमन की दृष्टि से रेलवे सुविधा सारंगढ़ के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या सारंगढ़ में कभी रेल की सीटी गूंजेगी?
या फिर यह सपना भी वर्षों तक केवल घोषणाओं और फाइलों में ही कैद रहेगा?
अब देखना होगा कि सरकार की इच्छाशक्ति और जनभावनाओं का यह संगम सारंगढ़ को रेलवे लाइन की ऐतिहासिक सौगात दिला पाता है या नहीं।

- काजू के पौधे संग हुआ अभिनंदन: संयुक्त शिक्षक संघ की हरित पहल से प्रभावित हुईं नवपदस्थ कलेक्टर… - May 13, 2026
- शिक्षकों की समस्याओं पर डीईओ से संयुक्त शिक्षक संघ की दो टूक चर्चा, जल्द समाधान का मिला भरोसा… - May 13, 2026
- बड़ी खुशखबरी: अब सारंगढ़ में ही मिलेगा महानगरों जैसा इलाज! सुप्रसिद्ध MD विशेषज्ञ डॉ. श्रिया अग्रवाल गुप्ता अब हर दिन उपलब्ध… - May 13, 2026
