कोसीर। नगर के स्थानीय बौद्ध बिहार में आयोजित 15 दिवसीय श्रामणेर शिविर का समापन श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण के बीच हुआ। समापन अवसर पर बौद्ध भिक्षुओं एवं भगवान बुद्ध के अनुयायियों ने नगर में भव्य धम्म रैली निकालकर शांति, करुणा, समानता और बंधुत्व का संदेश जन-जन तक पहुंचाया। रैली में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में उपासक-उपासिकाएं शामिल हुए, जिससे पूरा नगर बुद्धमय हो उठा।

बुद्ध बिहार से हृदय स्थल तक निकली प्रेरणादायी रैली

शिविर में विभिन्न स्थानों से पहुंचे धम्म भिक्षुओं की उपस्थिति में रैली की शुरुआत स्थानीय बौद्ध बिहार से हुई। हाथों में धम्म ध्वज और जयकारों के साथ निकली रैली नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए हृदय स्थल पहुंची। इस दौरान “जय भीम”, “जय बुद्ध” और “नमो बुद्धाय” के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा।
हृदय स्थल पहुंचकर बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया तथा उनके बताए सामाजिक न्याय और समानता के मार्ग को याद किया गया। इसके साथ ही भगवान बुद्ध के उपदेशों एवं धम्म संदेशों का वाचन भी किया गया।
“संविधान ने सबको समान अधिकार दिया” — भदंत बुद्धघोष
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बौद्ध बिहार के भंते भदंत बुद्धघोष ने कहा कि समाज में आज भी ऊंच-नीच और भेदभाव देखने को मिलता है, लेकिन बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान ने सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान किया है।
उन्होंने कहा, “भगवान बुद्ध ने समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का संदेश दिया था। यदि हम बुद्ध के विचारों को अपने जीवन में अपनाएं, तो समाज में भाईचारा और शांति स्थापित हो सकती है।”
भंते बुद्धघोष ने युवाओं से बुद्ध के पंचशील सिद्धांतों को अपनाने तथा सामाजिक समरसता और मानवता की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।
धम्म, विनय और ध्यान का दिया गया प्रशिक्षण
15 दिनों तक चले इस श्रामणेर शिविर में प्रतिभागियों को धम्म, विनय एवं ध्यान का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। शिविर के दौरान अनुशासन, सदाचार और आध्यात्मिक जीवनशैली पर विशेष जोर दिया गया। समापन अवसर पर उपस्थित लोगों ने इस आयोजन को समाज में जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला बताया।
