हस्तलिखित धरोहरों को मिलेगा नया जीवन: सारंगढ़ से ‘ज्ञान भारत मिशन’ को मिली बड़ी ताकत…

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सारंगढ़। जिले में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल के तहत कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने बरमकेला क्षेत्र के ग्राम चांटीपाली के विद्वान डॉ. बिहारी लाल साहू से शुक्रवार को सौहार्दपूर्ण भेंट की। इस दौरान उन्होंने ज्ञान भारत मिशन के तहत प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों एवं सांस्कृतिक कृतियों के संरक्षण में सहयोग देने की अपील की।
भेंट के दौरान नोडल अधिकारी डिप्टी कलेक्टर उमेश साहू ने मिशन के व्यावहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य देशभर में बिखरी अमूल्य पांडुलिपियों को संरक्षित कर डिजिटल स्वरूप में लाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस ज्ञान-सम्पदा से लाभान्वित हो सकें।
इस अवसर पर डॉ. बिहारी लाल साहू ने क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह अंचल न केवल छत्तीसगढ़ का पूर्वी द्वार है, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक केंद्र भी है। यहां छत्तीसगढ़ी के साथ-साथ उड़िया और विभिन्न जनजातीय भाषाएं भी प्रचलन में हैं, जो इस क्षेत्र की बहुभाषिक और बहुसांस्कृतिक पहचान को दर्शाती हैं।
उल्लेखनीय है कि ‘ज्ञान भारत मिशन’ देश की विशाल हस्तलिखित धरोहर को संरक्षित, डिजिटलीकृत और व्यापक स्तर पर प्रसारित करने की एक राष्ट्रीय पहल है। इस मिशन के लिए वर्ष 2024 से 2031 तक कुल 482.85 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अब तक ‘कृति संपदा’ डिजिटल भंडार में 44.07 लाख से अधिक पांडुलिपियों का दस्तावेजीकरण किया जा चुका है।
भारत की पांडुलिपियां केवल कागज पर लिखे शब्द नहीं, बल्कि हमारी बौद्धिक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक चेतना का जीवंत प्रमाण हैं। भक्ति काल से लेकर आधुनिक युग तक फैली यह धरोहर भारत को वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाती है। ‘ज्ञान भारत मिशन’ इसी विरासत को डिजिटल युग में सहेजने का एक व्यापक और दूरदर्शी प्रयास है।
इस पहल से न केवल सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण मिलेगा, बल्कि भारत को पुनः “विश्व गुरु” बनाने की दिशा में भी यह एक मजबूत कदम साबित होगा।

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