इस मंदिर में चढ़ती हैं हथकड़ियां! अपराधी भी झुकाते हैं सिर, माता के 64 रूपों का अनोखा रहस्य…
भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ के मध्य की सीमा में स्थित है जोगणिया माता मंदिर, जिसकी ख्याति इतनी दूर तक फैली हुई है कि जोगणिया माता मंदिर पर बूंदी, कोटा, चित्तौड़गढ़ और भीलवाड़ा के भक्त माता रानी के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं.
इस प्राचीन मंदिर की खासियत यह है कि यहां एक साथ कई देवियों का दर्शन लाभ एक साथ मिल जाता है. यहां एक मान्यता यह भी है कि इस मंदिर में लोग अपराध छोड़ने की संकल्प भी लेते है. जिसके बाद वह यहां हथकड़ी चढ़ाते हैं. मंदिर परिसर में एक पेड़ स्थित है जहां पर बड़ी तादात में हथकड़ीया लटकी हुई है.
मंदिर के पुजारी के अनुसार इस प्राचीन प्रमुख शक्तिपीठ जोगणिया माता मंदिर परिसर में चारों ओर देवियों की प्रतिमा की स्थापना की गई है. इनमें 64 जोगणिया देवियों के स्वरूप के रूप में प्रतिमा स्थापित की गई है. नवरात्र के चलते मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, महाआरती एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है. श्री जोगणिया माता शक्ति पीठ प्रबन्ध एवं विकास संस्था बेगू चित्तौड़गढ़ के अध्यक्ष सत्यनारायण जोशी ने बताया कि भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिले की सीमा में स्थित जोगणिया माता मंदिर अनादि काल से है.
यहां पर माता लक्ष्मी, सरस्वती और मां दुर्गा के रूप में विराजमान हैं. लोक कथाओं के अनुसार बम्बावदा के समीपस्थ ही जोगणिया माता हाड़ाओं की आराध्या (कुलदेवी) थी. राव देवा की पुत्री के विवाहोत्सव पर राव देवा ने जगदम्बा जोगणिया को सादर आमंत्रित कर प्रार्थना की कि मां उसका निमंत्रण स्वीकार कर उसे धन्य करें. माता रानी ने यहां जोगण के रूप में दर्शन दिए थे. तब से ही मां का नाम जोगणिया माता के रूप में प्रसिद्ध हो गया.
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