“खेतों से कमाई का नया मॉडल” – युवा किसान रमेश प्रेमी ने जैविक खेती से लिखी सफलता की कहानी…

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सारंगढ़। जिले के बिलाईगढ़ विकासखंड के ग्राम जमगहन के युवा किसान रमेश प्रेमी आज आधुनिक और जैविक खेती के दम पर सफलता की नई मिसाल बन चुके हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत, नई तकनीक और वैज्ञानिक सोच के जरिए खेती को लाभ का मजबूत जरिया बना दिया है।

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जैविक खेती से बढ़ाई जमीन की ताकत

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रमेश प्रेमी करीब 5 एकड़ भूमि में खेती कर रहे हैं, जहां वे मुख्य रूप से सब्जी उत्पादन पर ध्यान देते हैं। उनकी प्रमुख फसलों में खीरा, लौकी, करेला, टमाटर और बैंगन शामिल हैं। खास बात यह है कि वे करेला की खेती में ज्यादा फोकस करते हैं, जिससे उन्हें बेहतर उत्पादन और मुनाफा मिल रहा है।
वे रासायनिक उर्वरकों का कम उपयोग कर प्राकृतिक और जैविक तरीकों को अपनाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।

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इंटरक्रॉपिंग से बढ़ाया मुनाफा

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रमेश प्रेमी केवल एक फसल पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि इंटरक्रॉपिंग पद्धति अपनाकर चना (बूट), प्याज, अदरक और हल्दी की भी खेती करते हैं। इससे एक ही जमीन से कई फसलों का उत्पादन लेकर वे अपनी आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार कर रहे हैं।

ड्रिप सिस्टम से पानी की बचत, उत्पादन में वृद्धि

आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए उन्होंने अपनी खेती में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाया है। इस तकनीक से पानी की बचत होती है और पौधों को सही मात्रा में पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में वृद्धि होती है।

विभागीय सहयोग से मिली नई दिशा

रमेश प्रेमी को बिलाईगढ़ के कृषि एवं उद्यानिकी विभाग से समय-समय पर मार्गदर्शन और सहयोग मिलता रहा है। नई तकनीकों और आधुनिक उपकरणों के उपयोग से उन्होंने अपनी खेती को और अधिक उन्नत बनाया है।

खेती से रोजगार भी, गांव में बदलाव भी

उनकी खेती से न सिर्फ उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है, बल्कि वे गांव की लगभग 10 महिलाओं को पूरे साल रोजगार भी दे रहे हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और गांव में रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।

मेडिकल से खेती तक का सफर

रमेश प्रेमी ने बीफार्मेसी की पढ़ाई की है और कुछ समय तक मेडिकल एवं हॉस्पिटल क्षेत्र में कार्य भी किया। लेकिन वर्ष 2016 में उन्होंने खेती को अपना मुख्य व्यवसाय बनाने का निर्णय लिया। कोरोना काल के बाद उन्होंने पूरी तरह खेती में खुद को समर्पित कर दिया।

“नई तकनीक से खेती बनेगी सबसे बेहतर विकल्प”

रमेश प्रेमी बताते हैं कि
“मैंने मेडिकल फील्ड की पढ़ाई की, लेकिन खेती में संभावनाएं ज्यादा नजर आईं। अगर पढ़ाई और तकनीक को खेती से जोड़ा जाए, तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। आज वही कर रहा हूं और सफल हूं।”

युवाओं के लिए प्रेरणा बने रमेश प्रेमी

वे युवाओं को संदेश देते हैं कि आधुनिक तकनीक, मेहनत और सही मार्गदर्शन के साथ खेती को अपनाया जाए तो यह एक सम्मानजनक और लाभकारी व्यवसाय बन सकता है।
आज रमेश प्रेमी न केवल खुद सफल किसान हैं, बल्कि आसपास के किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा का मजबूत स्रोत बन गए हैं।
उनकी सफलता यह साबित करती है कि नई सोच, तकनीक और मेहनत के साथ गांव में रहकर भी सुनहरा भविष्य बनाया जा सकता है।

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