टिमरलगा में ‘खनन माफिया’ का राज! सुप्रीम गाइडलाइन दरकिनार, प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल…
रायगढ़। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले का कंक्रीट ग्राम कहे जाने वाला टिमरलगा इन दिनों अवैध खनन को लेकर जबरदस्त सुर्खियों में है। यहां लाईम स्टोन की अवैध माइंस का बेखौफ संचालन न सिर्फ प्रशासनिक निर्देशों की अनदेखी को उजागर कर रहा है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइनों की भी खुली अवहेलना का मामला बनता जा रहा है।
बताया जा रहा है कि ग्राम टिमरलगा में पिछले कई दिनों से खनिज विभाग की कथित सरपरस्ती में अवैध उत्खनन धड़ल्ले से जारी है। हाल ही में सारंगढ़ एसडीएम वर्षा बंसल ने मौके पर दबिश देकर पोकलेन मशीनें जब्त की थीं, लेकिन इसके बाद भी खनिज विभाग की ओर से की गई कार्रवाई महज खानापूर्ति तक सीमित नजर आ रही है।
जिले के कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे की छवि एक संवेदनशील और सक्रिय प्रशासक की रही है, जो खुद ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं। बावजूद इसके, उनके अधीन खनिज अमला पूरी तरह बेलगाम और निरंकुश होता दिख रहा है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
कई गांवों में फैल चुका अवैध खनन का जाल
टिमरलगा ही नहीं, बल्कि लालाधुरवा, सरसरा, खर्री बड़े और सेंदुरस जैसे गांवों में भी लाईम स्टोन का अवैध उत्खनन खुलेआम जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि टिमरलगा में खनन माफिया इतने प्रभावशाली हो चुके हैं कि खनिज विभाग के अधिकारी यहां झांकने तक से कतराते हैं।
सरकारी जमीन और नदी तक को नहीं छोड़ा
जानकारी के मुताबिक, टिमरलगा में सूरज होटल के पीछे शासकीय भूमि पर अवैध माइंस संचालित हो रही है। स्थिति इतनी गंभीर है कि खनन माफिया महानदी के तट तक को नुकसान पहुंचाने से बाज नहीं आ रहे हैं। अवैध रूप से निकाले गए बोल्डरों को रॉयल्टी पर्चियों में खपाकर पूरे खेल को वैध दिखाने की कोशिश की जा रही है।
क्रशरों में खप रहा अवैध माल, संरक्षण के आरोप
सूत्रों की मानें तो गुड़ेली और टिमरलगा क्षेत्र में कई क्रशर प्लांट ऐसे हैं, जहां अवैध खनन का पत्थर आसानी से खपाया जा रहा है। यह भी आरोप है कि ‘लक्ष्मी कृपा’ के चलते जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। कुछ लोगों का यह भी दावा है कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं की भी इस पूरे खेल में अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी है।
बड़ा सवाल—कौन दे रहा संरक्षण?
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब जिले का मुखिया एक कर्मठ और ईमानदार छवि वाला अधिकारी है, तो उसके मातहत अमला इतनी बड़ी लापरवाही और मनमानी कैसे कर रहा है? आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध खनन का खेल फल-फूल रहा है?
फिलहाल पूरे मामले ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर ठोस कार्रवाई करते हैं या फिर यह गोरखधंधा यूं ही जारी रहता है।
