सारंगढ़। बिलाईगढ़ के बंगलाभाटा में चल रहे ‘विश्वास क्लीनिक’ का काला चिट्ठा अब जनता के सामने आ गया है। जिसे इलाज का मंदिर समझा जा रहा था, वह बिना एनओसी (NOC) के धड़ल्ले से मौत का व्यापार कर रहा था। प्रशासन की संयुक्त टीम ने दबिश देकर इस क्लीनिक को सील कर दिया है, लेकिन पीछे छोड़ गया है कई गंभीर सवाल।

क्यों गिरी गाज?
जांच में पाया गया कि क्लीनिक के पास नगर पंचायत का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) तक नहीं था। पिछले दो साल से बिना वैध कागजों के क्लीनिक चलाया जा रहा था।
स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, देवरबोड गांव की एक युवती की गलत इलाज के कारण मौत हो गई। हालांकि प्रशासन को लिखित शिकायत का इंतज़ार है, लेकिन धुआं वहीं उठता है जहां आग लगी हो।
डॉक्टर नदारद, पिता के भरोसे इलाज- चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि क्लीनिक के संचालक डॉ. सौरभ विश्वास अक्सर गायब रहते थे और उनके पिता (जो कि डॉक्टर नहीं हैं) क्लीनिक की कमान संभालते थे।
क्या मरीजों की जान इतनी सस्ती है? डॉ. विश्वास का ‘बचाव’ या ‘बहानेबाजी’?
क्लीनिक संचालक डॉ. सौरभ विश्वास ने खुद को पाक-साफ बताते हुए कहा ”मैने सिर्फ गैस का इंजेक्शन दिया था। युवती को हार्ट की समस्या थी, इसलिए बाहर रेफर किया। मेरी अनुपस्थिति में क्लीनिक सील करना गलत है।”
सवाल यह है जब क्लीनिक के पास वैध कागजात ही नहीं थे, तो वहां इंजेक्शन लगाने की हिम्मत कैसे हुई? क्या प्रशासन की यह कार्रवाई “देर आए दुरुस्त आए” वाली श्रेणी में है?
प्रशासन का सख्त रुख-
एसडीएम प्रफुल्ल रजक और तहसीलदार कमलेश सिदार के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने इलाके के अन्य अवैध क्लीनिक संचालकों में हड़कंप मचा दिया है। प्रशासन अब उस मृत युवती के मामले की भी तहकीकात कर रहा है।
अब देखना यह होगा कि क्या ‘विश्वास’ तोड़ने वाले इस क्लीनिक पर सिर्फ सील लगेगी या संचालक को सलाखों के पीछे भी भेजा जाएगा?
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