“सारंगढ़ : गुडेली में सरकारी जमीन पर ‘दबंगई’ का पहरा”…पानी टंकी के लिए सुरक्षित भूमि पर कब्जा, ग्रामीण लामबंद…
सारंगढ़। तहसील के ग्राम गुडेली में विकास कार्यों को ठेंगा दिखाते हुए दबंगों द्वारा शासकीय भूमि को हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्कूल पारा मोहल्ले में जिस जमीन को ग्रामीणों की प्यास बुझाने हेतु ‘नल-जल योजना’ के तहत पानी टंकी निर्माण के लिए सुरक्षित और प्रस्तावित किया गया था, वहां अब भू-माफियानुमा दबंगों द्वारा बलपूर्वक ईंट-पत्थर खड़े किए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने इस ‘अवैध निर्माण’ के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर अविलंब कार्रवाई की मांग की है।
विकास पर ‘कब्जे’ की मार: जहाँ बोर है, वहीं बन रहा अवैध मकान-
प.ह.नं. 43, राजस्व निरीक्षक मंडल गोडम के अंतर्गत आने वाले इस स्थल पर पूर्व से ही सरकारी बोर चालू स्थिति में है। शासन से पानी टंकी की स्वीकृति मिलने के बाद जब निर्माण की तैयारी शुरू हुई, तभी गांव के ही श्रवण चौहान, सहोद्रा चौहान, डोंगहीन चौहान और शौकी चौहान ने बिना किसी वैध अधिकार के उक्त भूमि पर कब्जा कर मकान बनाना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी संपत्ति को अपनी निजी जागीर समझकर विकास कार्य को बाधित किया जा रहा है।
पंचायत की भी नहीं सुन रहे रसूखदार-
मामला तब और गंभीर हो गया जब ग्रामीणों और ग्राम पंचायत ने इस अवैध कब्जे का विरोध किया। शिकायत के मुताबिक, कब्जाधारी न केवल अश्लील गाली-गलौज पर उतारू हैं, बल्कि ग्रामीणों को झूठे केस में फंसाने और ‘अप्रिय घटना’ कारित करने की खुली धमकी दे रहे हैं। दबंगों के इस आतंक के कारण मोहल्ले में भय का माहौल है और शासन की योजना अधर में लटकी हुई है।
जनहित या व्यक्तिगत स्वार्थ?-
ग्रामीणों ने तीखे शब्दों में प्रशासन से सवाल किया है कि क्या चंद रसूखदारों के निजी स्वार्थ के लिए पूरे गांव के पीने के पानी के हक को मारा जाएगा? आवेदन में स्पष्ट मांग की गई है कि उक्त विवादित स्थल पर हो रहे निर्माण कार्य पर ‘स्टे’ (रोक) लगाया जाए और अतिक्रमणकारियों को शासकीय भूमि से बेदखल कर सलाखों के पीछे भेजा जाए।
इनका कहना है:
”शासकीय भूमि पर कब्जा कर पानी टंकी के निर्माण को रोकना जनहित के विरुद्ध है। यदि प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह मामला कानून-व्यवस्था की बड़ी स्थिति बन सकता है। कलेक्टर को इस संवेदनशील मामले का संज्ञान लेकर तत्काल बुल्डोजर चलवाना चाहिए।”
— ग्रामवासी, गुडेली (स्कूलपारा मोहल्ला
