सारंगढ़ वन विभाग में फूटा आक्रोश: “साहब! मानसिक दबाव में कैसे करें काम?”कर्मचारियों ने खोला मोर्चा: बिना जांच वेतन वृद्धि रोकने और ‘अघोषित तानाशाही’ के खिलाफ वन कर्मचारी संघ ने सौंपा ज्ञापन..तीन दिनों के भीतर समाधान न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी..
सारंगढ़। जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ में वन विभाग के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ (जिला शाखा) ने विभाग के उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए ‘मानसिक प्रताड़ना’ का आरोप लगाया है। संघ ने वनमंडलाधिकारी (DFO) को एक तीखा ज्ञापन सौंपकर विभाग में व्याप्त अव्यवस्थाओं और कर्मचारियों के प्रति अपनाए जा रहे कठोर रवैये पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है।
अधिकारियों पर तानाशाही का आरोप: “बिना मौका दिए सजा”-
कर्मचारी संघ का सबसे गंभीर आरोप यह है कि उच्च अधिकारी बिना किसी ठोस जांच या मौके की वस्तुस्थिति जाने ही कर्मचारियों पर कार्रवाई कर रहे हैं।
संघ ने एक विशिष्ट मामले का उल्लेख करते हुए बताया कि एक कर्मचारी को अवैध अतिक्रमण प्रकरण में बिना किसी समुचित जांच के दोषी मान लिया गया।
सजा के तौर पर उक्त कर्मचारी की वेतन वृद्धि (Increment) रोक दी गई, जिसे संघ ने पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और नियमों के विरुद्ध बताया है।
संघ की मांग है कि किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से पहले स्थल जांच (Spot Inspection) अनिवार्य होनी चाहिए।
काम का भारी बोझ-
एक कंधे पर तीन परिसरों की जिम्मेदारी
ज्ञापन में जिले में कर्मचारियों की भारी कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है।
वर्तमान में एक-एक कर्मचारी पर दो से तीन परिसरों (Complexes) का कार्यभार है।
इस अतिरिक्त दबाव के बावजूद, कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के बजाय बार-बार नोटिस और कार्रवाई का डर दिखाकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
संघ के अनुसार, विशेषकर कोरोना काल में किए गए कठिन कार्यों और वृक्षारोपण/मनरेगा से जुड़े जमीनी संघर्षों को नजरअंदाज कर, एकपक्षीय रिपोर्ट के आधार पर वसूली की जा रही है।
अल्टीमेटम: तीन दिन में समाधान या आर-पार की जंग
वन कर्मचारी संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब और अधिक मानसिक दबाव सहन करने को तैयार नहीं हैं।
”अधिकारियों द्वारा बनाया जा रहा भय का माहौल अनुचित है, इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल गिर रहा है बल्कि विभागीय कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।”
संघ ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इन समस्याओं का तीन दिवस के भीतर निराकरण नहीं किया गया, तो जिले के समस्त वन कर्मचारी काम बंद कर आंदोलन की राह पकड़ने को विवश होंगे।
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