सारंगढ़ | जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व जिला अध्यक्ष एवं किसानों के हितैषी नेता अरुण मालाकार ने प्रदेश की साय सरकार पर किसानों की उपेक्षा का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि स्वयं को किसान हितैषी बताने वाली सरकार में आज किसान अपनी मेहनत की फसल बेचने के लिए समितियों के चक्कर काटने को मजबूर है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में किसानों का धान अब तक नहीं बिक पाया है।
अरुण मालाकार ने बताया कि धान खरीदी की समय-सीमा समाप्त होने में अब सप्ताह भर से भी कम समय शेष है, लेकिन जिले में 30 प्रतिशत से अधिक किसान अब तक अपना धान नहीं बेच पाए हैं। मौजूदा हालात में किसान भारी अव्यवस्था, प्रशासनिक दबाव और अनिश्चितता का सामना कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में किसान को शुरू से अंत तक परेशानियों से जूझना पड़ता है। पहले खाद, बिजली और पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता है, फिर कड़ी मेहनत से फसल तैयार कर जब किसान समितियों में धान बेचने पहुंचता है तो वहां भी उसे अपमान और परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अरुण मालाकार ने चिंता जताते हुए कहा कि इस समय किसान गहरे असमंजस में है कि उसकी फसल बिकेगी भी या नहीं, क्योंकि अभी तक कई किसानों को टोकन तक नहीं मिला है, जबकि धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी निर्धारित है।
किसानों के पक्ष में मजबूती से खड़े होते हुए अरुण मालाकार ने साय सरकार से मांग की कि धान खरीदी की समय-सीमा बढ़ाई जाए तथा प्रदेश के सभी किसानों से बिना भेदभाव धान खरीदा जाए, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिल सके और वे आर्थिक संकट से उबर सकें।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस पार्टी और वे स्वयं किसानों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ेंगे।

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