नीलामी से पहले ही रेतघाटों की लूट, खनिज विभाग की चुप्पी पर सवाल..

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सारंगढ़–बिलाईगढ़। जिले में 5 रेत घाटों की नीलामी प्रक्रिया अभी शासन व ठेकेदारों के बीच पूर्ण भी नहीं हो पाई है, लेकिन इससे पहले ही इन रेत घाटों में अवैध उत्खनन का बड़ा खेल धड़ल्ले से चल रहा है। जशपुरकछार, दहिदा और घोटला छोटे क्षेत्र में खुलेआम रेत की अवैध खुदाई और परिवहन हो रहा है, जिससे प्रशासनिक निगरानी और खनिज विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार जिले में सारंगढ़ विकासखंड में 2 रेत घाट स्वीकृत हुए हैं, जिनकी नीलामी के बाद ठेकेदार को प्रभार सौंपने की प्रक्रिया अभी जारी है। इसी तरह बिलाईगढ़ ब्लॉक में 2 रेत घाट स्वीकृत हैं, जहां कार्यवाही प्रक्रियाधीन है, जबकि बरमकेला ब्लॉक में 1 रेत घाट की नीलामी तो हो चुकी है, लेकिन शेष औपचारिकताएं अभी पूरी नहीं हुई हैं। इसके बावजूद इन सभी रेत घाटों में बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन जारी है।
बताया जा रहा है कि दहिदा एवं जशपुरकछार रेत घाटों में पोकलैंड मशीन लगाकर भारी मात्रा में रेत की खुदाई की जा रही है। प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टर, हाईवा और अन्य व्यावसायिक भारी वाहनों से रेत का परिवहन किया जा रहा है। ट्रैक्टर चालकों से रॉयल्टी के नाम पर अज्ञात लोगों द्वारा अवैध वसूली भी शुरू कर दी गई है, जबकि हाईवा जैसे भारी वाहनों से भी बड़े स्तर पर रेत निकाली जा रही है।
चौंकाने वाली बात यह है कि महानदी के किनारे तक हाईवा पहुंचाने के लिए बाकायदा अस्थायी सड़क का निर्माण भी कर दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह अवैध कारोबार सुनियोजित तरीके से संचालित हो रहा है। सवाल यह है कि जब नीलामी की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, रॉयल्टी व्यवस्था लागू नहीं हुई और ठेकेदारों को रेत घाटों का अधिपत्य नहीं सौंपा गया, तो आखिर किसके संरक्षण में रेत घाटों का संचालन किया जा रहा है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनिज विभाग सब कुछ जानते हुए भी आंख मूंदकर बैठा हुआ है। यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कार्रवाई नहीं की, तो यह अवैध रेत उत्खनन न केवल राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि पर्यावरण और नदी तंत्र को भी गंभीर क्षति होगी। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग कब जागता है और इस “रेत माफिया” के खेल पर कब लगाम लगती है।

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