शिक्षक द्वारा रिश्वत देकर खबर दबाने की साजिश…हेड मास्टर, शाला समिति अध्यक्ष और कथित पत्रकार पर गंभीर आरोप..
हेमंत पटेल की रिपोर्ट
सारंगढ़-बिलाईगढ़ : जिले के भटगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय से एक ऐसी सनसनीखेज घटना सामने आई है जिसने पूरे शिक्षा जगत को हिला दिया है। विद्यालय “जोर “के प्रधान पाठक झब्बू राम साहू पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वह बच्चों से निजी काम कराते हैं, नशे में स्कूल आते हैं और खबर दबाने के लिए पत्रकारों को रिश्वत देने तक से नहीं चूके।
यह मामला न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है, बल्कि बच्चों के अधिकार और उनके भविष्य के साथ किए जा रहे खिलवाड़ का जीता-जागता उदाहरण भी बन गया है।
क्या है मामला –
21 अगस्त को जोर स्कूल से शिकायतें आईं कि प्रधान पाठक बच्चों से स्कूल का फर्नीचर और टेबल उठवाते हैं। जब पत्रकार मौके पर पहुंचे तो पाया कि बच्चे स्कूल समय में पढ़ाई की बजाय टेबल-कुर्सियां ढो रहे थे। इसी दौरान यह भी खुलासा हुआ कि प्रधान पाठक शराब के नशे में धुत होकर समय से पहले बच्चों को छुट्टी देकर खुद घर चले गए थे।
इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सबूत के साथ विभिन्न समाचार पत्रों, यूट्यूब चैनलों और वेब पोर्टलों पर प्रकाशित/प्रसारित कर दी गईं।
लेकिन मामला यहीं नहीं थमा। अगले ही दिन यानी 22 अगस्त को पत्रकारों को फोन करके भटगांव बुलाया गया। यहां प्रधान पाठक झब्बू राम साहू, शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष और धनीराम निराला नामक व्यक्ति मौजूद थे। धनीराम निराला नामक व्यक्ति स्वयं को पत्रकार बताता है।
इन्होंने मिलकर पत्रकारों से कहा कि “खबर को और आगे मत बढ़ाइए, इसे रोक दीजिए।” इसके बदले पैसों का प्रस्ताव रखा गया। प्रधान पाठक ने तो साफ स्वीकार किया – “हमसे गलती हो गई है, यह पैसा रख लो और खबर मत चलाओ।”
पत्रकारों ने ठुकराई रिश्वत
पत्रकारों ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और इस पूरे घटनाक्रम को कैमरे में कैद कर लिया।
पत्रकारों के अनुसार
“प्रधान पाठक और समिति अध्यक्ष ने साफ कहा कि बच्चों से काम कराने और शराब पीने वाली खबर मत चलाइए। लेकिन उनके द्वारा कहा गया शिक्षा के अधिकार और बच्चों के भविष्य से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगा।
शिक्षा का मंदिर भ्रष्टाचार और शराबखोरी का अड्डा बन चुका है जिस पर प्रशासनिक कार्रवाई अनिवार्य है।
ग्रामीणों में आक्रोश –
उक्त घटना से ग्रामीण भी आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि बच्चों को पढ़ाने के बजाय उनसे मजदूरी करवाना और शराब के नशे में स्कूल चलाना, बेहद शर्मनाक है। ग्रामीणों ने जिला शिक्षा विभाग और प्रशासन से दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
वहीं अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्यवाही नहीं हुई तो वे स्कूल का घेराव करेंगे।
प्रशासन की चुप्पी पर गंभीर सवाल
यह मामला अब जिला शिक्षा विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।
क्या प्रधान पाठक, समिति अध्यक्ष और कथित पत्रकार पर FIR दर्ज की जाएगी?
क्या भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और बाल श्रम कानून के तहत सख्त कार्रवाई होगी?
क्या शिक्षा विभाग दोषियों को संरक्षण देगा या बच्चों के भविष्य की रक्षा करेगा?
कानूनी पहलू
क़ानून विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में कई धाराएं लग सकती हैं –
बच्चों से काम कराना बाल श्रम कानून का उल्लंघन है।
नशे में स्कूल समय में ड्यूटी करना शासकीय सेवा आचरण नियम के खिलाफ है।
रिश्वत देने की कोशिश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है।
अगर प्रशासन सख्त रुख अपनाए तो दोषियों को जेल तक जाना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि शिक्षा के मंदिर में किस तरह भ्रष्टाचार, नशाखोरी और घूसखोरी ने जड़ें जमा ली हैं। यह मामला सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की साख पर सवाल खड़ा करता है।
देखने वाली बात होगी कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस मामले पर कितनी गंभीरता से कदम उठाते हैं।

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