बिग-ब्रेकिंग सारंगढ़:-अवैध पटाके भंडारण की खबर लगते ही मच गई खलबली…! खबर प्रकाशन पर पुलिस पहुंची कोतरी, फिर…? पढ़िए इस पर क्या कहा पटाखे कारोबारी और थाना प्रभारी अमित शुक्ला ने….
रायगढ़। रायगढ़ जिले का सबसे बड़े विधानसभा है सारंगढ़, जो वर्तमान में जिला भी घोषित हो गया है। यहां दशहरा और दीवाली में 2 ही चीज प्रशिद्ध हैं-1 गढ़ विच्छेदन और दीवाली में मिलने वाले पटाके। अगर तीसरे पर जोर दें तो सारंगढ़ के एक प्रशिद्ध पटाका व्यापारी जिससे बारे में सारंगढ़ के बच्चे बच्चे जानते हैं। व्यापारी जी का पटाके कारोबार में दखल इतना कि न सिर्फ रायगढ़ जिला बल्कि दीगर प्रांतों में भी सारंगढ़ के उक्त व्यापारी द्वारा पटाको का सप्लाई किया जाता है।
सूत्रों के अनुसार उक्त व्यापारी का दुकान तो सारंगढ़ में है लेकिन पटाको का भंडारण कोतरी में कराया जाता है। और थोक के थोक वही से अन्य बड़े व्यापारियों को सप्लाई भी किया जाता है।

अवैध पटाखे भंडारण की सूचना पर पुलिस ने दी दबिश-
स्थानीय न्यूज़ में एक बेबाक पत्रकार ने बिना किसी दवाब के कोतरी में अवैध पटाको के भंडारण की जानकारी की खबर चलाई थी, और फोन के माध्यम से टीआई सारंगढ़ को सूचना दी थी। और फ़ोटो सहित खबर प्रकाशन किया था, जिस पर पुलिस टीम उक्त व्यापारी के ठिकाने पर निरीक्षण करने पहुची थी।

क्या कहते हैं थाना प्रभारी अमित शुक्ला:-
जब इस पर हमने थाना प्रभारी अमित शुक्ला से जानकारी मांगी तो श्री शुक्ला ने बताया कि शिकायत पर हमारी टीम कोतरी गयी थी, लेकिन हमारे द्वारा निरीक्षण करने पर उक्त समय मे पटाके भंडारण क्षमता के अनुरूप ही था।
क्या कहता है व्यापारी:-
जब इस बाबत पटाके व्यापारी से हमारी टीम ने जानना चाहा कि जो भी पटाके मीडिया के कैमरे में कैद की थी आआन-फानन में कहां गायब हो गया तो महोदय का कहना था कि मैं इस बारे में दीवाली के बाद बताता हूँ। जब सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हरित पटाके की बिक्री के सम्बंध में पूछना चाहा तो महोदय द्वारा कोई जवाब नही दिया और ग्राहकों की भीड़ होने का बचकाना बहाना गया। और जानकारी बताने हेतु बाध्य नही हूँ कहकर मीडिया से कहा गया।
विचारणीय बिंदु-
जब स्थानीय मीडिया में भंडार गृह में जो फ़ोटो लिया गया था उसमें स्पस्ट नज़र आ रहा है कि भंडार गृह भरा हुआ है और बहुत मात्रा में पटाके बाहर थे। तो आआन-फानन में वो पटाके पुलिस के जाने से पहले हिबकैसे गायब हो गये?
दूसरी बात-जब सुप्रीम कोर्ट ने कमप्रदूषण वाले, कम आवाज़ वाले और हरित पटाकों हेतु निर्देशित किया है, जिसे पूर्णतः पालन करने का आदेश संवेदनशील कलेक्टर भीमसिंह ने दिया है तो पर्यावरण विभाग के सरकारी नुमाइंदे इन पर चेक कर कार्यवाई क्यों नही करते? या उन्हें भी दीवाली का तोहफा पहुंचा दिया गया है?
