सरकारी नौकरी के नाम पर 5 करोड़ की ठगी: पुलिस ने रेलवे कर्मी समेत गिरोह के 4 अन्य सदस्यों को दबोचा, CGPSC के पूर्व चेयरमैन टामन सोनवानी का साला और उसकी पत्नी पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार…

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रायपुर। रायपुर पुलिस ने बीते दिनों छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपी पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के साले देवेंद्र जोशी और उनकी पत्नी झगीता जोशी को नौकरी का झांसा देकर ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया था।

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अब इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए देवेंद्र और झगीता जोशी के गिरोह के 4 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में से एक रेलवे का कर्मचारी भी शामिल है। पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि इन सभी ने अब तक योजनाबद्ध तरीके से पैनल बनाकर 60 से ज्यादा बेरोजगारों से 5 करोड़ रुपये की ठगी की है।

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बता दें कि जिन 4 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, उनमें नफीज आलम (उम्र 33 वर्ष) कोरबा, हलधर बेहरा (31 वर्ष) रायगढ़, सोमेश दुबे (उम्र 44 वर्ष) गरियाबंद और स्वप्निल दुबे (उम्र 44 वर्ष) रायपुर का रहने वाला है। इनमें स्वप्निल दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे रायपुर की वैगन रिपेयर शॉप में तकनीशियन-I पद पर कार्यरत है। गिरोह के मास्टरमाइंड देवेंद्र और झगीता जोशी इन चारों के साथ मिलकर लोगों को बड़े अधिकारियों से जान-पहचान होने का दावा कर सरकारी नौकरी दिलाने का लालच देते थे। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने मंत्रालय की फर्जी ईमेल आईडी बनाकर फर्जी नियुक्ति पत्र तक जारी किए थे।

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कैसे हुआ खुलासा?

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पीड़िता अंजना गहिरवार ने पुलिस को बताया कि फरवरी 2021 में जब वह अपने मौसा-मौसी देवेंद्र जोशी और झगीता जोशी के घर आई थी, तब उसे सरकारी नौकरी दिलाने का वादा किया गया। आरोपियों ने उसे भरोसा दिलाया कि वे बड़े अधिकारियों के संपर्क में हैं और सेटिंग करके नौकरी लगवा देंगे। इस झांसे में आकर अंजना और अन्य लोगों ने 25-25 लाख रुपये दिए, लेकिन नौकरी नहीं मिली। जब पैसे वापस मांगे गए, तो आरोपियों ने टालमटोल करना शुरू कर दिया।

पुलिस जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने बेरोजगार युवाओं को ठगने के लिए अलग-अलग विभागों में नियुक्ति के फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। इसके साथ ही अपने वाहनों पर ‘छत्तीसगढ़ शासन’ की नेम प्लेट लगाकर लोगों को भरोसे में लेते थे और उन्हें सरकारी दफ्तरों तक ले जाकर झांसा देते थे। रेलवे में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत आरोपी स्वप्निल दुबे खुद बेरोजगारों की फर्जी वेरिफिकेशन प्रक्रिया करवाता था। इसके बाद मंत्रालय के नाम से बनी फर्जी ईमेल आईडी से बेरोजगारों को नियुक्ति पत्र भी प्रेषित किया जाता था।

पुलिस ने गिरोह को ऐसे दबोचा

गौरतलब है कि पुलिस ने इस मामले में गहन जांच के बाद मास्टरमाइंड देवेंद्र जोशी और उसकी पत्नी झगीता को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उन्होंने अपने साथी स्वप्निल दुबे का नाम बताया, जो बेरोजगारों की वेरिफिकेशन में शामिल था। पुलिस को स्वप्निल की मौजूदगी की पुख्ता जानकारी मिलते ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। आगे की जांच में नफीज आलम, हलधर बेहरा और सोमेश दुबे के नाम सामने आए, जिन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया। गिरोह के एक अन्य सदस्य विकास शर्मा की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है।

ठगी की रकम कहां गई?

आरोपियों ने ठगी से कमाए पैसे को जमीन, सोना, इलेक्ट्रॉनिक सामान और क्रिप्टो करेंसी में निवेश किया। पुलिस ने इन संपत्तियों को जब्त कर लिया है।

जब्त संपत्ति:

सोना: 4 सिक्के, 1 हार, 1 बिंदिया
इलेक्ट्रॉनिक सामान: 3 मोबाइल, 2 एसी, 1 फ्रीज, 2 पंखे, 1 होम थिएटर
वाहन: 1 स्कॉर्पियो, 1 स्कूटी
नकदी: आरोपियों के बैंक खातों में जमा 15 लाख रुपये होल्ड किए गए
जानकारी के मुताबिक पुलिस ने सोनपैरी, टेकारी और कमल विहार में खरीदी गई आरोपियों की जमीन पर भी रोक लगा दी है।

फरार आरोपियों की तलाश जारी

गौरतलब है कि मामले में थाना सिविल लाइंस पुलिस ने अब तक लगभग 20 से अधिक पीड़ितों की पहचान की है। जिनसे पूछताछ और दस्तावेज एकत्र कर बारीकी से विवेचना की जा रही है। जांच के दौरान गिरोह के अन्य सदस्यों के भी इस ठगी में शामिल होने के सबूत मिले हैं। फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।

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