फर्जी तरीके से राशनकार्ड बनवाकर सरकारी दुकानों से राशन लेने पर अब एक्शन की तैयारी की जा रही है। एक ही जिले में कई ऐसे राशनकार्ड धारी है, जो जो आयकर दाता होते हुए भी हर महीने प्रति यूनिट पांच किलोग्राम गेहूं व चावल ले रहे हैं। इनमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्र दोनों जगहों के कार्डधारक हैं। अब कार्रवाई की आहट सुनते ही इन राशनकार्ड धारकों में हड़कंप मच गया है।

सरकारी पड़ताल में खुलासा हुआ है कि खीरी जिले में पात्र गृहस्थी के 5024 ऐसे राशन कार्डधारक मिले हैं, जो आयकर दाता होते हुए भी हर महीने प्रति यूनिट पांच किलोग्राम गेहूं व चावल ले रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो करीब 20 हजार ऐसे कार्डधारक हैं, जो अपने खेतों में उत्पादित गेहूं सरकार को बेचते हैं, लेकिन कोटे की दुकान से वह राशन भी ले रहे हैं। मीडिय़ा रिपोर्ट्स में जिला पूर्ति अधिकारी अंजनी कुमार सिंह से बताया गया है कि शासन ने जिला पूर्ति अधिकारी अंजनी कुमार सिंह को आयकर दाताओं की सूची भेजी है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों के पास पांच एकड़ या उससे अधिक जमीन है और उनके राशनकार्ड बने हैं तो लेखपाल और ग्राम पंचायत अधिकारी से जांच कराकर नाम काटा जाएगा और जरूरतमंदों के राशनकार्ड बनाए जाएंगे। आयकर भरने वाले कार्ड धारकों की जांच पूर्ति निरीक्षकों को सौंपी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार कई लोगों ने बनवाए फर्जी राशन कार्ड
खीरी जिले में कुल 8.32 लाख राशनकार्ड बने हुए हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में 79 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र में 64 प्रतिशत राशनकार्ड बनाने की सीमा है, लेकिन अधिकारी कहते हैं कि इस सीमा से कहीं ज्यादा राशनकार्ड बन चुके हैं। वैसे तो राशनकार्ड बनाने के लिए शहरी क्षेत्र में निर्धारित आय सीमा तीन लाख और ग्रामीण क्षेत्र में ढाई लाख रुपये है, लेकिन शासन की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि समक्ष व्यक्ति भी सरकारी राशन ले रहे हैं। अधिकारी कहते हैं कि शासन ने रिपोर्ट भेजी है, लेकिन बिना सत्यापन कराए सवाल नहीं उठाया जा सकता, क्योंकि एक परिवार में अगर एक व्यक्ति आयकर दाता है तो उसके पिता या भाई सहित परिवार के अन्य सदस्यों को राशन से वंचित नहीं किया जा सकता। कई बार यह भी होता है कि बैंक से कर्ज लेने के लिए आयकर जमा करना पड़ता है।
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