सारंगढ़

पटवारी उमेश पटेल के निलंबन आदेश से पटवारी संघ आक्रोशित.. प्रदेश व्यापी आंदोलन के मूड मे पटवारी संघ… निलंबन को संघ ने ठहराया नाज़ायज, जांच अधिकारी पर भी लगा प्रश्न चिन्ह? आंदोलन और हड़ताल से किसान, विद्यार्थी सहित आम जनता परेशान… पटवारी संघ को जनता, मीडिया और जनप्रतिनिधियों का मिल रहा अपार समर्थन…

जगन्नाथ बैरागी..

सारंगढ़: भारत मे ग्रामीण प्रशासन की रीड की हड्डी पटवारियों को कहा जाता है, विद्यार्थियों के जाति, निवास, आय,वंशवृक्ष के अलावा खेतों और कृषि क्षेत्रों को मापने, भूमि पर राजस्व संग्रह का समन्वय करने और इन क्षेत्रों में उगाई जा रही फसलों का विवरण प्रस्तुत करने की क्षमता की रिपोर्ट से लेकर धान खरीदी समेत दर्जनों कामों के बोझ तले अल्प पगार मे भरपुर काम करने वाले योद्धा होते हैँ पटवारी। लेकिन दुःखद परिस्थिति तब आन पड़ती है जब जनता के ताने के अलावा प्रशासनिक दंड की लाठी पड़े। वर्तमान सारंगढ़ जिले मे शान्त समझे जाने वाले ये राजस्व विभाग की रीड कहे जाने वाले जमात सड़क पर आंदोलन करने उतर आये हैँ, अब तक हर प्रशासनिक निर्णय को चुपचाप सिरोधार्य करने वाले पटवारी अपने साथी उमेश पटेल के निलंबन के विरोध मे सप्ताह भर से हड़ताल पर उ हैँ और अब सीधे सीधे प्रशासन से तकराव के हद तक गुजर जाने को तैयार हैँ।

आखिर क्या है कारण –

मामला सारंगढ़ प्रभार मे कार्यरत पटवारी उमेश पटेल से संबधित है जहाँ प्राप्त जानकारी के अनुसार एक किसान के द्वारा 21 मई 2024 को शिकायत मे कहा गया था कि उनके खसरा नंबर को पटवारी ने विलोपित कर दिया हैँ एवं डिजिटल हस्ताक्षर भी नही दिख रहा है। जब इसकी जानकारी पटवारी उमेश पटेल को हुई तो किसान हित मे उनके द्वारा 24-05-2024 को डिजिटल हस्ताक्षर को अपडेट किया गया, फलस्वरूप किसान द्वारा 02 जून को रजिस्ट्री भी करा लिया गया।

जांच अधिकारी पर भी उठा प्रश्न चिन्ह –

पटवारी संघ ने जांच अधिकारी पर सीधा प्रश्न लगाते हुए बताया कि आज दिनांक तक भुईयां के पटवारी आई डी में किसी खसरे का डिजिटल हटाने एवं किसी खसरे को विलोपित करने का आप्शन मौजूद नहीं है। उसके बावजूद पटवारी को निलंबित करने की मांनसिकता से झूठा आरोप लगाकर कार्यवाही की गई है जो कि – अत्यंत ही निंदनीय है। इस आदेश को देखकर राजस्व पटवारी संघ के सभी सदस्य भयभीत हैं , इस तरह के आदेश से स्पष्ट है , कि – पटवारियों पर कार्य वाही करने की मानसिकता वाले अधिकारी अपने पद का दुरूपयोग करते हुये कभी भी किसी पटवारी पर कार्यवाही कर सकते हैं। इसलिए सभी पटवारी अपने भविष्य को देखते हुए आंदोलन पर जाने को विवश हैँ।

दो निलंबन आदेश से भी उठ रहे सवाल –

उमेश पटेल पटवारी हल्का नंबर 28 सारंगढ़ को कार्यालय कलेक्टर जिला सारंगढ़बिलाईगढ़ छग.आदेश कमांक 1976 शिका./ 20 24 सारंगढ़ दिनांक 05 जून 24 के तहत आवेदक राजेन्द्र कुमार पिता स्व० रामलाल यादव के नाम पर स्थित भूमि खसरा नंबर 975/1/व/1 रकबा 0.014 हे.के चतुर्सीमा नजरी नक्शा विकय प्रयोजन हेतु प्रदान करने के उपरांत डिजिटल हस्ताक्षर हटाया जाना तथा बिना समक्ष प्राधिकारी के अनुज्ञा के खसरा नंबर 975/1 को विलोपन किये जाने का प्रथमतया दोषी होने पर छग. सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील नियम 1966 के नियम 09 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबन किया जाकर उमेश कुमार पटेल के विरूद्ध विभागीय जांच संस्थित किये जाने आदेशित किया गया था, जिसपर संघ ने जाकर बताया कि भुईयां के पटवारी आई डी में किसी खसरे का डिजिटल हटाने एवं किसी खसरे को विलोपित करने का आप्शन मौजूद नहीं है। तो किस बिनाह पे पटवारी ने खसरे को विलोपित किया? फिर अपनी गलती का अहसास करते हुए 06 जुन को पुनः आदेश निकाला गया कि पटवारी द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर को विलोपित किया गया है इसलिए निलंबन की जाती है। जबकि धान बिक्री समय अधिकतर किसान इसी समस्या से पीड़ित थे तब यही पटवारी रात भर जागकर किसान हित मे कार्य किये थे। पटवारी संघ ने निलंबन आदेश को जांचकर्ता अधिकारी की गलत मानसिकता करार दिया है।

पटवारी के समस्याओं पर भी विचार करे प्रशासन –

पटवारी संघ ने मीडिया के माध्यम से अपने समस्याओं को इंगित कराते हुए बताया की कुछ पटवारी 02 से 03 हलका को संभाल रहे हैँ जिससे उनपर अतिरिक्त भार पड़ रहा है, जिससे मुख्यालय मे रहना भी संभव नही होब्पा रहा, कई मुख्यालयों मे भवन की सुविधा नही है, जहाँ भवन हैँ उक्त कुछ जगहो पर इंटरनेट सुविधा नही है फिर भी हम जनता और प्रशासन के प्रति पुरी तरह समर्पित हैँ, ऐसे मे बिना उचित कारण से पटवारियों को निलंबित करना उनके आत्मविश्वास को कमजोर करने के समान है। पटवारियों ने राजस्व मंत्री से इस मामले मे उचित जांच कर उमेश पटेल के निलंबन को रद्द कर बहाली करने अपील की है।

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