जगन्नाथ बैरागी

रायगढ़। देर शाम गरज के साथ बारिश से जहां एक ओर किसानों में खुशी की लहर थी तो वहीं काम कर लौट रहे के व्यक्ति गाज के चपेट में आ गये।
जानकारी के अनुसार तीनो बिरसिंगडीह वार्ड क्रमांक-06 के निवासी हैं। जिसमे अमृतलाल खड़िया की मृत्यु आकाशीय बिजली की चपेट में आने से हो गयी, वहीं महादेव सिदार और मायाराम कठौतिया की हालत नाजुक बताई जा रही है।

आसमान में अपोजिट एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते और घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाए हुए टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है जो धरती पर गिरती है। आसमान में किसी तरह का कंडक्टर न होने से बिजली पृथ्वी पर कंडक्टर की तलाश में पहुंच जाती है, जिससे नुकसान पहुंचता है।धरती पर पहुंचने के बाद बिजली को कंडक्टर की जरूरत पड़ती है। आकाशीय बिजली जब लोहे के खंभों के अगल- बगल से गुजरती है तो वह कंडक्टर का काम करता है। उस समय कोई व्यक्ति यदि उसके संपर्क में आता है तो उसकी जान तक चली जाती है। आसमानी बिजली का असर ह्यूमन बॉडी पर कई गुना होता है। डीप बर्न होने से टिशूज डैमेज हो जाते हैं। उनको आसानी से ठीक नहीं किया जा सकता है। बिजली का असर नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। हार्ट अटैक होने से मौत हो जाती है। इसके असर से शारीरिक अपंगता का खतरा होता है।
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