सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सरगुजा के हितग्राही इन दोनों एक अलग ही परेशानी से जूझ रहे हैं। 35 रुपये में 35 किलो चावल प्राप्त करने वाले कार्डधारियों को 70 रुपये का चार पैकेट मसाला लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है।

गरीबी रेखा से ऊपर जीवन-यापन करने वाले परिवारों को तो मसाला नहीं लेने पर चावल नहीं देने तक की शिकायत सामने आने लगी है।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली में मसाला वितरण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कोई लिखित आदेश जारी नहीं करने से हितग्राही भी असंमजस में हैं। कुछ राशन दुकान संचालक तो मसाला को अनिवार्य बताकर इसकी बिक्री कर रहे है। सर्वाधिक परेशानी में गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले हितग्राही हैं। पिछले दो -तीन महीने से उन्हें उचित मूल्य राशन दुकानदार से मसाले को लेकर सवाल-जबाब करना पड़ रहा है। खासकर नगर निगम अंबिकापुर क्षेत्र के कुछ उचित मूल्य राशन दुकानदारों द्वारा मसाला नहीं लेने की स्थिति में दूसरा खाद्यान्न नहीं देने के आरोप भी लग रहे हैं। अब शिकायतें बढ़ने लगी है।
गरीबों का कहना है कि 35 रुपये में उन्हें चावल मिल जाता है अब 70 रुपये वे मसाला के लिए कहां से राशि की व्यवस्था करेंगे। इसे लेकर कोई सूचना सार्वजनिक नहीं होने से असमंजस की स्थिति निर्मित हो गई है। खबर है कि यह मामला खाद्य मंत्री अमरजीत भगत तक पहुंच चुका है। उन्होंने इस मामले को लेकर जिला खाद्य अधिकारी रविन्द्र सोनी से भी पूछताछ की है। शासन स्तर से अनिवार्यता नहीं है लेकिन कुछ उचित मूल्य राशन दुकानदार खाद्यान्न के साथ मसाला की भी बिक्री कर रहे है। खाद्य मंत्री ने जिला खाद्य अधिकारी को स्पष्ट आदेश दिया है कि खाद्यान्न के साथ जब मसाला अनिवार्य नहीं है तो यह सूचना हितग्राहियों तक पहुंचनी चाहिए।
नागरिक आपूर्ति निगम से हुई है आपूर्ति
विभागीय सूत्रों की मानें तो मसाला की उपलब्धता नागरिक आपूर्ति निगम के माध्यम से की गई है। उचित मूल्य राशन दुकानदारों को मसाला के पैकेट दिए गए है। उन्हें निर्देशित किया गया है कि हितग्राहियों को खाद्यान्न के साथ मसाला के पैकेट भी उपलब्ध कराए जाए। इसके लिए 70 रुपये की राशि निर्धारित की गई है।
बाजार में 120 रुपये का होने का दावा
नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा हितग्राहियों के लिए चार प्रकार के मसाले का अलग-अलग पैकेट उपलब्ध कराया गया है। इसमें धनिया, मिर्च ,गरम मसाला और हल्दी के पैकेट हैं। हितग्राहियों से यह दावा किया जा रहा है कि खुले बाजार में इतनी ही मात्रा के दूसरे ब्रांड के मसाला के चार पैकेट की कीमत कम से कम 120 रुपये है उसे अनुदान में सिर्फ 70 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है।
इनका कहना
नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा मसाला के पैकेट उचित मूल्य राशन दुकानों को उपलब्ध कराए गए हैं। खाद्यान्न के साथ मसाला लेना अनिवार्य नहीं है। खुले बाजार से कम दाम का होने के कारण हितग्राहियों की सुविधा के लिए इसे उपलब्ध कराया जा रहा है।
रविंद्र सोनी
जिला खाद्य अधिकारी सरगुजा
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