गायनिक व शिशुरोग विभाग में अव्यवस्था: 100 बेड वाले एमसीएच में 36 की जगह थे 18 कर्मी , 9 का खत्म होगा अटैचमेंट…. सिविल सर्जन आर एन मंडावी ने डीएमएफ से नर्स और टेक्निकल स्टाफ भर्ती की मांगी है अनुमति…
डॉक्टर और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी से जूझ रहे मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल (एमसीएच) के लिए नई मुश्किल खड़ी हो गई है। यहां 36 के बदले 18 स्टाफ थे। इसमें 9 प्रशिक्षित स्टाफ दूसरे अस्पतालों से अटैचमेंट पर यहां भेजे गए थे, शासन ने दो दिन पहले स्वास्थ्य कर्मचारियों को मूल पदस्थापना पर भेजे जाने का आदेश दिया। उसके बाद एमसीएच में गर्भवती महिलाओं का प्रसव, इलाज मुश्किल हो जाएगा।
सिविल सर्जन ने गुरुवार को कलेक्टर को पत्र लिखकर डीएमएफ से कर्मचारी भर्ती की मांग की है। एमसीएच 100 बेड का हास्पिटल है। रोजाना औसतन 13 गर्भवती का प्रसव यहां पर हर रोज 13 14 गर्भवती महिलाओं का आपरेशन या नार्मल डिलिवरी हो रही है, महीने में लगभग 75 सिजेरियन होते हैं।
15 बेड ऐसे है, जिसमें सर्दी, खांसी, बुखार, थैलेसिमिया सहित अन्य बीमारियों के भी मरीज रहते हैं। इन बेड पर हमेशा 7 8 मरीज भर्ती रहते है। यहां के कर्मचारियों कहना हैं कि मेडिकल कालेज हास्पिटल में सिजेरियन वाली महिलाओं के लिए 25 बेड हैं, बाकी को एमसीएच भेजा जाता है। जिला अस्पताल के मरीज व गर्भवती भी यहां आती हैं, इससे दबाव बढ़ जाता है।
एमसीएच और जिला चिकित्सालय में 18 18 कर्मचारी
आपरेशन से लेकर एनआरसी, गायनिक, एसएनसीयू जैसे विभाग में 24 घंटे मरीज की निगरानी जरूरी है। इसमें तीन शिफ्ट में कर्मियों की ड्यूटी होती है। केजीएच में 36 कर्मी हैं। जिला अस्पताल का गायनिक और पीडियाट्रिक वार्ड में अभी एमसीएच में चलता है, इसलिए सिविल सर्जन ने एमसीएच और जिला चिकित्सालय में 18 18 कर्मचारियों को तैनात किया हुआ है। दो साल पहले जिला अस्पताल के भवन को पीडब्ल्यूडी की टीम ने जर्जर और अनुपयोगी बताया था। यहां यहां नेत्र, अस्थि, ईएनटी सहित दूसरे विभागों का इलाज और
आपरेशन होता है। यहां कर्मचारियों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। पुराने भवन में ओपीडी नेत्र रोग विभाग, इमरजेंसी वार्ड सहित कुछ वार्ड का जीर्णोद्धार चल रहा है।
डॉक्टर पहले ही कम थे, अब प्रशिक्षित स्टाफ भी नहीं बचे एमसीएच गायनिक वार्ड में 4 विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। इसमें
पुसौर से 3 दिन के लिए एक डॉक्टर अटैच किए हैं। एक लंबे अवकाश पर हैं। यहां डाक्टर की कमी है। एमसीएच में 36 पद स्वीकृत हैं। 18 कर्मी थे, जिसमें 5 छुटटी पर हैं। 9 ऐसे हैं, जो अटैचमेंट पर थे। मूल पदस्थापना पर भेजने के शासन के आदेश के बाद अब अस्पताल में प्रशिक्षित स्टाफ नहीं बचेगा। अब अस्पताल में पैरामेडिकल स्टाफ के नाम पर सिर्फ सफाई कर्मी ही बच जाएंगे।
डीएमएफ से मांगे हैं कर्मचारी, कलेक्टर को लिखा है पत्र
“एमसीएच में अधिकांश कर्मचारी अटैचमेंट पर थे। ये प्रशिक्षित थे। राज्य शासन से अटैचमेंट खत्म करने का आदेश आया है। अब ऑपरेशन और डिलिवरी तक नहीं हो पाएगी। कलेक्टर को गुरुवार को पत्र भेजा है। मदर एंड चाइल्ड अस्पताल में डीएमएफ से नर्स और टेक्निकल स्टाफ की भर्ती की अनुमति मांगी है। शासन से व्यवस्था होती रहेगी, अभी तात्कालिक व्यवस्था जरूरी है।” डॉ. आरएन मंडावी, सिविल सर्जन
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