सिर्फ नाम को छोड़कर शाहिद-विजय सेतुपति की फ़िल्म में farzi कुछ नही है!….
जिस तरह बॉलीवुड को नकार कर फैंस द्वारा साउथ के सिनेमा को हाथों हाथ लिया जा रहा है बॉलीवुड के निर्माता निर्देशकों की जिम्मेदारी बढ़ गयी है. बाजार में बने रहना है तो कुछ नया लाना होगा इंडस्ट्री के हिसाब से कोरी लफ्फाजी नहीं है.
भले ही हिंदी पट्टी के प्रोड्यूसर्स डायरेक्टर्स को सुधरने में अभी वक़्त लगे लेकिन ऐसा भी नहीं है कि यहां अच्छा काम या नए प्रयोग नहीं किये जा रहे. 10 फरवरी को अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज़ होने जा रही शाहिद कपूर, विजय सेतुपति, के के मेनन और राशी खन्ना की फिल्म ‘फ़र्ज़ी’ इसकी बानगी भर है. अभी कुछ दिन पहले ही फिल्म का फर्स्ट लुक पोस्टर जारी हुआ उसके बाद मोशन पोस्टर रिलीज किया गया. क्योंकि इन्हीं दोनों चीजों से दर्शकों में उत्सुकता बढ़ गयी थी उन्हें इंतजार था फिल्म के ट्रेलर का. लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मेकर्स ने ‘फ़र्ज़ी’ का ट्रेलर रिलीज कर दिया है.
अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज होने वाली फर्जी में शाहिद कपूर और विजय सेतुपति
ट्रेलर की शुरुआत शाहिद के प्रभावी वन-लाइनर्स से होती है जो जल्द ही संबंधित संवादों और परिस्थितियों का आकार ले लेता है. लंबे समय से फैंस की शिकायत थी कि बॉलीवुड के स्क्रिप्ट राइटर अच्छी कहानियों पर काम नहीं कर रहे. फर्जी का जैसा ट्रेलर है, हमें ये कहने में कोई गुरेज नहीं है कि इस बार कहानी में प्रयोग हुआ है और प्लाट को बेहतर बनाया गया है. वहीं जब हम फिल्म के लिए स्टार कास्ट की बात करते हैं तो साउथ सुपरस्टार विजय सेतुपति समेत जिन लोगों को भी फिल्म में कास्ट किया गया, ट्रेलर बता रहा है कि उन्होंने अपने हिस्से के साथ इंसाफ किया है.
फिल्म की जान शाहिद हैं इसमें कोई शक नहीं है. लेकिन ट्रेलर देखें तो मिल रहा है कि फिल्म का जो भी हिस्सा पुलिस ऑफिसर बने सेतुपति के पाले में आया है, अपनी एक्टिंग से वो बतौर दर्शक हमें इम्प्रेस करते नजर आ रहे हैं. इसके अलावा जब हम फिल्म में केके मेनन और राशि खन्ना की उपस्थिति को देखते हैं तो ये दोनों भी एक्टिंग में सहज और अपने रोल के प्रति ईमानदार हैं.
होने को तो फर्जी एक अनूठा क्राइम थ्रिलर है लेकिन जैसे डायलॉग्स फिल्म में रखे गए हैं इसमें ह्यूमर का भरपूर तड़का डाला गया है. फर्जी कहानी है एक चतुर अंडरडॉग स्ट्रीट आर्टिस्ट की जो ढेर सारा पैसा बनाना चाहता है. इसके लिए वो नकली नोट की छपाई का काम करता है और अपनी क्रिएटिविटी से नकली नोट छापने में भी अपना ट्रेडमार्क छोड़ देता है.
फिल्म के हीरो बने शाहिद को हारना पसंद नहीं है. इस जानकारी के बाद कि कोई धड़ल्ले से नकली नोट छाप रहा है पुलिस उसे पकड़ना चाहती हैं वहीं केके मेनन एक डॉन की भूमिका में दिखाई पड़ रहे हैं जो ये बताता है कि नकली नोट छापकर शाहिद ने डॉन के धंधे में सेंधमारी की है. कह सकते हैं शाहिद की फर्जी चूहे और बिल्ली का बहुत ही एंटरटेनिंग खेल है. जो न केवल दर्शकों को एंटरटेनमेंट की फुल डोज देती है. बल्कि ये भी बताती है कि बस कोशिश करने की देर है अगर बॉलीवुड छह ले तो संभव सब है यहां भी फ़िल्में और वो भी अच्छी फ़िल्में नार्मल बजट में बन सकती है.
जाते जाते हम एक बात जरूर बताना चाहेंगे कि फर्जी का ट्रेलर देखते हुए महसूस होता है कि मेकर्स ने इस फिल्म में कोई बहुत ज्यादा पैसा नहीं लगाया है बल्कि सारा फोकस दर्शकों को एंटरटेन करने पर रखा है. होने को तो फिल्म 10 फरवरी को रिलीज हो रही है लेकिन ट्रेलर कह रहा है फिल्म ठीक ठाक है और इसे देखने के लिए 3 घंटे का समय अपनी दिनचर्या से निकाला जा सकता है.
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