ठंड के इस मौसम में सभी लोगों को सेहत का विशेष ख्याल रखने की जरूरत होती है, इस दौरान बरती गई जरा सी भी लापरवाही कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, तापमान में गिरावट के साथ कई प्रकार के रोगों का खतरा बढ़ जाता है, बच्चों-बुजुर्गों में इस मौसम में निमोनिया होने का जोखिम अधिक होता है। सभी लोगों को इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या से बचाव करते रहना आवश्यक होता है। निमोनिया वायरस, बैक्टीरिया या कवक के कारण होने वाला संक्रमण है जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। इस स्थिति में सांस लेना कठिन हो जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सर्दियों के मौसम में निमोनिया का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। तापमान में गिरावट के अलावा इनडोर पॉल्यूशन को इस समस्या को बढ़ाने वाला माना जाता है। सर्दियों के मौसम में हमारा ज्यादा समय घरों के भीतर और लोगों के निकट संपर्क में अधिक बीतता है, इसके कारण इस स्वास्थ्य समस्या का जोखिम अधिक हो सकता है। निमोनिया की समस्या कुछ स्थितियों में गंभीर जटिलताओं का कारण भी बन सकती है। बच्चों-बुजुर्गों में इसे मृत्यु का जोखिम बढ़ाने वाला भी माना जाता है, ऐसे में सभी लोगों को इस प्रकार के स्वास्थ्य जोखिमों से लगातार बचाव करते रहना चाहिए। आइए जानते हैं कि इसके लिए किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक हो जाता है?
बच्चों-बुजुर्गों में ऐसे लक्षणों पर दें ध्यान
वैसे तो निमोनिया किसी भी उम्र में हो सकता है, पर बच्चों-बुजुर्गों में इससे संबंधित जटिलताओं का खतरा अधिक होता है। बच्चों में कई बार इसके स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते हैं। कुछ बच्चों में निमोनिया के कारण सांस की तकलीफ, उल्टी या खाने-पीने में परेशानी हो सकती है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों में तेज सांस या घरघराहट जैसी दिक्कतें देखी जाती है। वृद्ध लोगों में सांस की जटिलताओं का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। निमोनिया के इन लक्षणों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
कफ (बलगम) वाली खांसी का लगातार बने रहना।
बुखार- ठंड लगना।
सांस की तकलीफ।
सीने में दर्द जो सांस लेने या खांसने पर और बढ़ जाता है।
उल्टी और सिरदर्द।
निमोनिया से बचाव के लिए कराएं टीकाकरण
निमोनिया से बचाव के लिए कई टीके उपलब्ध हैं जो इस संक्रमण को रोकने और जटिलताओं से बचाने में आपकी मदद कर सकते हैं। फ्लू वैक्सीन से इस संक्रमण से बचाने में आपके लिए मददगार हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, टीकाकरण के साथ-साथ सभी लोगों को निमोनिया से बचाव के उपाय करते रहना चाहिए। इनडोर पॉल्यूशन से बचाव करें और ठंड के मौसम में कुछ समय धूप और खुली हवा में जरूर बिताएं।
निमोनिया से बचाव के लिए क्या करें?
अच्छी स्वच्छता (हाथ धोना), धूम्रपान छोड़ना, नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ भोजन करके अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखने और निमोनिया होने के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए टीकारण सबसे कारगर तरीका है, इसके अलावा उनके आहार और पर्सनल हाइजीन का ध्याम रखकर इस बीमारी के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
इन बातों का भी रखें ध्यान
निमोनिया से बचने के लिए टीकाकरण के अलावा इन बातों का ख्याल रखना भी जरूरी है।
यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो इसे तुरंत बंद कर दें। धूम्रपान आपको श्वसन संक्रमण, विशेष रूप से निमोनिया के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है।
कम से कम 20 सेकंड के लिए नियमित रूप से अपने हाथों को साबुन और पानी से धोएं।
खांसते या छींकते समय मुंह नाक को अच्छी तरह से कवर करें। इसके बाद हाथों को धोएं।
शरीर की इम्युनिटी को मजबूत करने के लिए स्वस्थ जीवनशैली का पालन करें। पर्याप्त आराम करें, संतुलित आहार लें और नियमित व्यायाम की आदत बनाएं।
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