सारंगढ़। जब से सारंगढ़ अंचल के शासकीय बहु. उ. मा. विद्वालय को स्वामी आत्मानंद मे तब्दील किया गया है तब से ही उक्त विद्यालय के हिन्दी भाषी छात्र छात्रा लगातार भदभाव का शिकार हो रह हैं। कभी अचानक हिन्दी भाषी एडमिशन बंद करने का आदेश आ जाता है तो कभी अचानक से स्कूल के सभी 22 शिक्षकों को अन्यत्र स्थानांतरण कर दिया जाता है। पालकों की माने तो पिछले 2 वर्षों मे ही दर्जनों एसी घटनाएं घटी हैं। गौरतलब है कि सारंगढ़ मे 856 हिन्दी माध्यम के छात्र हैं जिनको अंग्रजी माध्यम के कारण अच्छी शिक्षा प्रणाली से वंचित होना पड़ रहा है।

दोनों माध्यम के विद्यार्थियों को एक साथ बैठाकर कराई जा रही पढाई –
सारंगढ़ के स्वामी आत्मानंद अग्रेजी माध्यम में लगभग 730 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं तो वहीं हिन्दी माध्यम में भी 850 से ज्यादा छात्र छात्रा हैं। विडंम्बना यह है कि पिछले कई महीनों से दोनो ही माध्यम के विद्यार्थियों को जबरन एक साथ बैठाकर पढ़ाई करवाई जा रही है जबकि दोनो ही माध्यमों के लायक जहां पर्याप्त शिक्षक हैं वही दो पालियों की सुविधा भी स्कुल प्रबंधन के साथ है। हिन्दी माध्यम के विद्यार्थियों को जबरन अग्रेजीकरण करना सर्वथा अनुचित है। आने वाले दिनों में स्कूल प्रबंधन के इस जिद का दुरगामी दुष्परिणाम देखने को मिल सकता है। मिली जानकारी के अनुसार हिन्दी माध्यम में अध्ययनरत छात्र छात्राओं के 90 प्रतिशत पालकों द्वारा बकायदा प्राचार्य को लिखित में आवेदन किया गया है ताकि हिन्दी माध्यम के विद्यार्थियों की अलग से पढ़ाई कराई जा सके। |
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