छत्तीसगढ़ में किसानों की आय को बढ़ावा देने के लिए और जैविक खेती को राज्य में प्रोत्साहित करने के लिए अब गोमूत्र ( Cow Urine ) की खरीद करेगी.

इससे संबंधित योजना राज्य में तैयार की जा रही है. गौरतलब है कि राज्य के पशुपालकों को आर्थिक तौर पर सशक्त बनाने के लिए और पशुपालन (Animal Husbandry) को लाभदायक बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा पहले से ही राज्य में किसानो से गोबर खरीद रही है. अधिकारियों के मुताबिक उत्तरी छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी शुरुआत की जाएगी. अगले दो सप्ताह में इस योजना के शुरू होने की उम्मीद है.
प्रदेश में गोधन न्याय योजना (Godhan Nyay Yojana) के तहत गोबर की खरीद की जाती है. फरवरी 2022 में यह तय किया गया था की गोबर की तरह ही गोमूत्र की खरीदारी भी किसानों से की जाएगी. इसके बाद गोमूत्र खरीदारी के तरीके क्या होंगे इसके लिए एक कमिटि का गठन किया गया, कमिटि को यह भी इस पूरी योजना के बारे में भी शोध करने के लिए कहा गया था. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक अधिकारियों ने बताया की किसानों से चार रुपए की प्रति लीटर की दर से गोमूत्र की करीद की जाएगी.
चार रुपए प्रति लीटर की दर से खरीदेगी सरकार
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सलाहकार प्रदीप शर्मा ने बताया कि गोमूत्र खरीद योजना पर अध्ययन के लिए बनायी कमिटि ने एक प्रस्ताव तैयार किया है जिसे जल्द ही मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा. कमिटि का प्रस्ताव है कि चार रुपए लीटर गोमूत्र की खरीदारी की जाए, इसके लिए मुख्यमंत्री से सहमति ली जाएगी. उन्होंने बताया की ग्राम गौठान समितियों से गोमूत्र की खरीदारी की जाएगी और प्रत्येक 15 दिन पर पशु मालिकों को इसके पैसे दिए जाएंगे. प्रदीप शर्मा ने कहा कि जिन गौठानों से पहले मांग आएगी, योजना के तहत उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी.
28 जुलाई को लॉन्च होगी योजना
छत्तीसगढ़ में मनायी जाने वाले स्थानीय त्योहार हेरेली के मौके पर इस योजना को राज्य में लॉन्च करने पर विचार किया जा रहा है. इस बार यह 28 जुलाई को मनाया जाएगा. उल्लेखनीय है कि 25 जून 2020 को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गोधन न्याय योजना की शुरुआत की थी. इस मौके पर उन्होंने कहा था कि छत्तीसगढ़ में खुले में मवेशियों को चराने की पंरपरा है. इसके कारण फसलों को नुकसान पहुंचता है. सरकार यह भी कहती है कि आवारा पशुओं के कारण शहर में दुर्घटनाएं भी होती रहती है जिससे जान-माल की क्षति होती है. क्योंकि जब गाय दूध देना छोड़ देती है उसे किसान छोड़ देते हैं. पर अगर सरकार किसानों से गाय के गोबर की खरीद करेंगी तो किसान उन गायों को खुले में नहीं छोड़ेंगे.
गोमूत्र से बनाए जाएंगे कीटनाशक
योजना के ढाई साल पूरे होने के बाद अब राज्य सरकार यह दावा करती है कि योजन की शुरूआत के बाद अब तक किसानों से बड़ी मात्रा में गोबर की खरीद की गयी है. इससे वर्मी कंपोस्चट बनाया जा रहा है. अब राज्य सरकार द्वारा गोमूत्र की खरीद की जाएगी, इससे कीटनाशक और फंगीसाइड बनाए जाएंगे. इससे जैविक खेती को राज्य में गति देने में मदद मिलेगी.
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