आर.के. लाइम चुना भट्टी में हजारों-लाखों टन डंप है अवैध बोल्डर जहरीली धुँवा से ग्रामीण परेशान , पर्यावरण विभाग को नहीं है कोई ध्यान
सारंगढ़ क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत टिमरलगा में आर.के. लाइम नामक चुना भट्ठा की मनमानी चरम सीमा पर है । इसको न तो पर्यावरण विभाग का डर है और ना ही माइनिंग विभाग का कोई खौप । किसी के नियम को पालन नहीं कर रहा है । इस पर पर्यावरण विभाग भी ध्यान नहीं दे रहा है और ना ही माइनिंग विभाग । यहाँ हजारों-लाखों टन बोल्डर डंप करके रखा हुआ है , इस पर भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है । ऐसा लग रहा है कि पर्यावरण विभाग के संरक्षण और माइनिंग विभाग के अधिकारी के सांठगांठ से यहाँ हजारों-लाखों टन बोल्डर डंप करके रखा हुआ है ।

हजारों टन बोल्डर का ना ही पलट पर्ची और ना ही कोई रॉयल्टी पर्ची

वहीं सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार आर. के. लाइम चुना भट्टी में ना तो कोई रॉयल्टी है और ना ही कोई पलट पर्ची । उसके बाद भी यह हजारों टन नहीं बल्कि लाखों टन बोल्डर डम करके रखा हुआ है , लेकिन माइनिंग विभाग है कि घोड़े बेच कर सो रहा है , चुना भट्टी पर तो इनका ख्याल ही नहीं आता है । वैसे तो रायगढ़ में छत्तीसगढ़ के नंबर वन कहे जाने वाले माइनिंग विभाग के अधिकारी बैठे हुए हैं , लेकिन इस चुना भट्ठी में ध्यान क्यों नहीं दे रहे हैं ? इस चुना भट्ठी पर आखिर किसका है संरक्षण , क्यों नहीं हो रहा है कार्यवाही ? यहाँ तो माइनिंग विभाग अभी हाल ही दिनों में अवैध उत्खनन पर करते हुए दो पोकलेन को जप्त किया था और इससे पहले आधा दर्जन गाड़ियों पर कार्यवाही किया था , लेकिन जैसे ही आर. के. चुना भट्टी की बात आ रही है तो अधिकारी जान कर भी अंजान बन रहे हैं ऐसा प्रतीत हो रहा है ।

आर. के. चुना भट्टी को पर्यावरण विभाग का संरक्षण?
अगर पर्यावरण विभाग अपने आप में आ जाए तो मजाल है कि कोई नियम धर्म का पालन ही नहीं करें और इतना बड़ा चुना भट्ठा चला दें , लेकिन यहां तो पर्यावरण विभाग के अधिकारी मौन धारण किए हुए हैं या तो हो सकता है मोटी-मोटी लिफाफे हर महीने के तौर पर लेते हों । यहाँ तो पर्यावरण विभाग माइनिंग विभाग से और गैर गुजरा नजर आ रहा है , क्योंकि यहां तो ग्रामवासी बीमारी से मर रहे हैं और रायगढ़ में बैठे पर्यावरण विभाग के अधिकारी घोड़े तान कर सो रहे हैं । ग्राम पंचायत टिमरलगा के ग्रामीण यहां संचालित आर.के. लाइम चुना भट्ठा से उत्पन्न प्रदूषण से काफी परेशान हैं। प्रदूषण की वजह से बीमारियां भी इन्हें घेर रही है।
इस चुना भट्ठी से निकलने वाली धुंआ कोयला सहित अन्य के कारण पूरा क्षेत्र प्रदूषित हो गया है और कृषि योग्य भूमि बंजर हो रहा है। किसानों को खेती करने में भारी समस्या हो रही है उनके खेतों में फसल भी नहीं हो पा रहा है।

चुना भट्ठी के धुएं से निकट के लोगों को न्यूमोनाइटिस,फेफड़ों का सिलिकोसिस, वातस्फीति दमा, फेफड़े का कैंसर सहित साँस,लंग्स,खुजली,खाँसी.त्वचा के रोग की बीमारी का ख़तरा बना रहेगा और प्रदूषण विभाग है कि मौन धारण कर बैठा हुआ है । वहीं पर्यावरण विभाग के अधिकारी सिर्फ कागजों में सो कर दे रहे हैं और इन जैसे बड़े-बड़े चुना भट्टी जैसे आर.के. लाइम में कुछ कार्यवाही नहीं हो रहा है। यहां बसे आस-पास के ग्रामीण धूल से मर रहे हैं । उस रोड में चलना भी दुश्वार हो गया है , लेकिन यहां तो भट्टे को खुला संचालित कर रहा है ।
ट्रैक्टरों से लाया जा रहा है बोल्डर
जब हमने इस संबंध में वहाँ बोल्डर ला रहे ट्रैक्टर ड्राइवर से बात किया तो वह जवाब देने में असमर्थ रहा ।उससे पूछा गया कि आपके पास रॉयल्टी पर्ची है क्या या आपके पास कोई डंप पर्ची है क्या ? तो वह ट्रेक्टर ड्राइवर बिना जवाब दिए ही भाग गया । इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आर.के. लाइम चुना भट्ठी बगैर रॉयल्टी पर्ची के ही अवैध बोल्डर लाकर डंप कर रहा है और शासन को चूना लगाने में लगा हुआ है ।
क्या कहते हैं सहायक खनिज अधिकारी ए बारीक
वही इस संबंध में जब हमने सहायक खनिज अधिकारी से संपर्क साधा तो उन्होंने बताया कि अगर वहाँ बिना रायल्टी पर्ची के बोल्डर डंप हो रहा है तो यह गलत है । नियम अनुसार इस प्लांट की जांच की जाएगी और जांच में अनियमितताएं पाए जाने पर सील की कार्यवाही की जाएगी ।
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