रायगढ़/अपने लिए आशियाना बनाने का सपना संजोए लोगों का बजट बिगड़ चुका है। घर बनाने के लिए जितने भी मटेरियल की जरूरत होती है, सबकी कीमतें बढ़ी हुई हैं । छह महीने पहले की तुलना में अब मकान बनाने पर करीब 40 प्रतिशत लागत बढ़ गई है।

महंगाई ने न केवल पेट्रोल, डीजल और खाद्य वस्तुओं को छुआ है बल्कि हर सेक्टर में इसका असर दिखा है । कंस्ट्रक्शन सेक्टर में तो महंगाई दर बहुत अधिक है । परिवार के लिए पक्के मकान का सपना देखने वालों के लिए समय बहुत कठिन है जितना बजट अनुमान लगाया था लागत उससे कहीं ज्यादा हो चुकी है। इसकी वजह छड़, सीमेंट , बालू, गिट्टी, वायर, सेनेटरी आयटम आदि की कीमत में इजाफा होना है । करीब एक साल पहले छड़ों की कीमत करीब 4000 रुपए प्रति टन थी। अक्टूबर नवंबर 2021 में यह कीमतें 5000 रुपए टन के आसपास थीं।

वर्तमान में छड़ों की कीमत 7600-8000 के बीच हैं । लोकल टीएमटी बार की कीमतें कुछ कम हैं । यही हाल सीमेंट का भी है । छह महीने पहले सीमेंट की कीमत 265-270 रुपए थी । अब सीमेंट की प्रति बोरी कीमत करीब 310-320 रुपए हो चुकी है । ब्रांडेड वायर के प्रति बंडल में 1000 रुपए तक का इजाफा हो चुका है । इस तरह से मटेरियल की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से कंस्ट्रक्शन का बजट बढ़ गया है। छह महीने पहले बनाया गया इस्टीमेट अब 40 प्रश तक बढ़ गया है ।
बालू के दाम भी बढ़े
जब से रेत के अवैध खनन व परिवहन के विरुद्ध कार्यवाही के आदेश दिए गए हैं कीमतें बढ़ गई पहले एक दम पर है ₹6000 में मिल जाता था अब कीमत ₹8904 हो चुकी है गिट्टी की कीमतों में भी पांच से 10% की बढ़ोतरी हो चुकी इस तरह से निर्माण कार्यों में लगने वाले सभी मटेरियल की कास्ट बढ़ चुकी है इसके अलावा लेबर कास्ट और प्लम्बिंग आइटम की कीमतें भी बढ़ गयी हैं।
लोन लेने वालों को दिक्कत
उन लोगों के लिए ज्यादा दिक्कतें हैं जिन्होंने छह महीने पहले लोन लेकर मकान बनाना शुरू किया है । उस समय बनाया गया इस्टीमेट पूरी तरह फेल हो चुका है । अब मकान निर्माण अगर आधा हुआ है तो मटेरियल कॉस्ट की वजह से अब बजट बढ़ गया है । जो मकान 10 लाख में बन जाता , वही अब साढ़े 12 लाख रुपए में बन रहा है ।
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