सारंगढ़। आदिम जाति विकास विभाग द्वारा संचालित आश्रम-छात्रावासों की व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक में कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इन मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने छात्रावासों में बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने, नियमित निगरानी रखने और सभी कमियों को समय-सीमा में दूर करने पर जोर दिया।
कलेक्टर ने निर्देशित किया कि छात्रावासों में बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए तथा वास्तविक उपस्थिति के आधार पर ही भोजन एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएं। पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं संचालित करने और त्रैमासिक परीक्षा परिणामों के आधार पर कमजोर विषयों की पहचान कर विशेष शैक्षणिक सहयोग देने को कहा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों की पढ़ाई में सुधार के लिए नियमित मूल्यांकन और प्रभावी प्रयास जरूरी हैं।
छात्रावासों की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए कलेक्टर ने सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं रखरखाव संबंधी कार्यों के लिए 50-50 हजार और 25-25 हजार रुपये की राशि जारी की। साथ ही भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छ पेयजल, शौचालयों की साफ-सफाई, विद्युत व्यवस्था और परिसर की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी छात्रावासों में सीसीटीवी कैमरों को 24 घंटे चालू रखने तथा उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।
बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर कलेक्टर ने नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के लिए कैलेंडर तैयार करने और चिकित्सकों के माध्यम से समय-समय पर जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य परीक्षण से संबंधित रिपोर्ट अद्यतन रखने तथा बच्चों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने पर जोर दिया। इसके अलावा छात्रावासों की सभी पंजियों एवं अभिलेखों को नियमित रूप से अद्यतन रखने के निर्देश भी दिए गए।
निरीक्षण व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए एसडीएम, तहसीलदार, जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को आकस्मिक निरीक्षण करने तथा निरीक्षण के दौरान मिलने वाली कमियों को समयबद्ध तरीके से दूर कराने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने कहा कि छात्रावासों की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा।
कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू ने कहा कि आश्रम-छात्रावास केवल बच्चों के रहने और खाने की जगह नहीं हैं, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास के केंद्र हैं। यहां बच्चों को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पौष्टिक भोजन और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की कमी न रहे और बच्चों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए निरंतर निगरानी की जाए।
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