सारंगढ़-बिलाईगढ़:
ग्राम फर्सवानी इन दिनों विकास के लिए नहीं, बल्कि अवैध महुआ और कच्ची शराब के काले कारोबार के चलते कुख्यात होता जा रहा है। गांव की गलियों से लेकर खेत-खलिहानों तक शराब माफियाओं का खूनी सिंडिकेट इस कदर हावी हो चुका है कि फर्सवानी का शांत माहौल पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। घर-घर में उजड़ते परिवार, शराबियों का उपद्रव और विरोध करने पर महिलाओं को मिलने वाली जानलेवा धमकियों के बीच अब फर्सवानी की पीड़ित महिलाओं ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। हर प्रशासनिक चौखट से दुत्कार मिलने के बाद महिलाओं ने सीधे जिले के तेजतर्रार पुलिस अधीक्षक (एसपी) सुनील शर्मा के दरबार में दस्तक देकर गांव को बचाने की मार्मिक गुहार लगाई है।
अवैध शराब का अड्डा बना गांव-
ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि फर्सवानी गांव में अवैध शराब का धंधा दिन-दूनी रात-चौगुनी रफ्तार से फल-फूल रहा है। सुबह के उजाले से लेकर देर रात तक गांव के प्रमुख रास्तों और गलियों में शराबियों व असामाजिक तत्वों का डेरा जमा रहता है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि महिलाओं और बेटियों का घर की दहलीज पार करना असुरक्षित हो गया है। गांव की मेहनत-मजदूरी का बड़ा हिस्सा माफियाओं की तिजोरी में जा रहा है, जिससे कई घरों के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं और युवा पीढ़ी नशे के दलदल में धंसकर अपना भविष्य बर्बाद कर रही है।
शराब माफियाओं की गुंडागर्दी-
फर्सवानी की जागरूक महिलाओं ने जब अपने बच्चों के भविष्य और घर की बर्बादी को रोकने के लिए आवाज उठाई, तो शराब माफियाओं ने अपनी दबंगई दिखाते हुए उन्हें सरेआम धमकियां देना शुरू कर दिया। माफिया खुलेआम महिलाओं को अंजाम भुगतने और घरों को तबाह करने की चेतावनी दे रहे हैं। खुलेआम घूमते इन अपराधियों के खौफ से गांव में दहशत का माहौल है, फिर भी अपने परिवार की रक्षा के लिए इन महिलाओं ने हिम्मत नहीं हारी।
पंचायत ने फेरा मुंह जिला शिविर में भी नहीं हुई सुनवाई-
महिलाओं ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले फर्सवानी ग्राम पंचायत में अपनी व्यथा रखी, कुछ दिन साथ देने मे बाद पता नही क्यों लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों ने आंखें मूंद लीं।
इसके बाद स्थानीय थाने में जाकर शराब माफियाओं के नाम गिनाए, खाना पूर्ति के लिए धर पकड़ भी हुई लेकिन खाकी की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। महिलाओं का आरोप था गाँव से माफियाओं को थाने तक लाया जाता है फिर छोड़ दिया जाता है.
जिला स्तरीय शिविर के बड़े मंचों पर भी आवेदन दिए गए, पर वहां भी सिर्फ कागजी आश्वासन ही मिला। सिस्टम की इसी घोर लापरवाही ने फर्सवानी में शराब माफियाओं के हौसले इतने बुलंद कर दिए कि वे खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं।
जिले के सख्त पुलिस कप्तान सुनील शर्मा से बची आखिरी उम्मीद-
जब फर्सवानी के भीतर और स्थानीय स्तर पर सुनवाई के सारे रास्ते बंद हो गए, तब थक-हार कर गांव की महिलाएं एकजुट होकर सीधे पुलिस अधीक्षक कार्यालय सारंगढ़-बिलाईगढ़ पहुंचीं। जिले में अपराधियों और अवैध नशे के सौदागरों पर लगातार प्रहार कर रहे सख्त पुलिस कप्तान की कार्यशैली पर भरोसा जताते हुए महिलाओं ने लिखित शिकायत सौंपी और फर्सवानी को नशामुक्त कराने की मांग की।
फर्सवानी की महिलाओं की मुख्य मांगें-
फर्सवानी गांव में अवैध महुआ शराब के अड्डों को तत्काल चिन्हित कर पुलिसिया बुलडोजर से नष्ट किया जाए।
महिलाओं को डराने-धमकाने वाले चिन्हित शराब माफियाओं को गिरफ्तार कर गैर-जमानती धाराओं में जेल भेजा जाए।
गांव के मुख्य मार्गों और संवेदनशील इलाकों में पुलिस पेट्रोलिंग रोजाना सुनिश्चित हो।
विरोध करने वाली महिलाओं और उनके परिवारों को तत्काल पुलिस सुरक्षा दी जाए।
एसपी कार्यालय द्वारा फर्सवानी की महिलाओं की शिकायत को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच और माफियाओं पर सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई का पूरा भरोसा दिलाया गया है। अब देखना यह होगा कि तेजतर्रार पुलिस कप्तान की नजर पड़ते ही फर्सवानी के शराब माफियाओं पर कानून का शिकंजा कब कसता है।
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