सारंगढ़। विश्व हृदय दिवस के अवसर पर हृदय रोगों के बढ़ते खतरे को लेकर लोगों को जागरूक करने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी दिशा में स्वास्थ्य जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने में डॉ. पुष्पेंद्र वैष्णव की भूमिका सराहनीय है। उन्होंने हृदय रोग के कारणों, चेतावनी संकेतों और बचाव के उपायों को लेकर लोगों को सजग रहने का संदेश दिया है।
विश्व स्तर पर हर वर्ष लाखों लोगों की मौत हृदय रोगों के कारण होती है। भारत में भी हृदय रोग अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है। बदलती जीवनशैली, तनाव, तंबाकू-गुटखा सेवन, शराब, फास्ट फूड, शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित दिनचर्या के कारण कम उम्र में भी हृदय संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ क्षेत्र में भी बदलती जीवनशैली चिंता का विषय बनती जा रही है। खेत-खलिहान का काम अब मशीनों पर निर्भर हो गया है, जबकि युवा और आम लोग लंबे समय तक मोबाइल तथा अन्य डिजिटल माध्यमों पर बैठे रहते हैं। देर रात तक जागना, तंबाकू, गुड़ाखू और गुटखा सेवन, अधिक नमक एवं तेलयुक्त भोजन तथा व्यायाम की कमी हृदय पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।
डॉ. पुष्पेंद्र वैष्णव ने लोगों को विशेष रूप से चेताया कि 40 वर्ष की उम्र के बाद भी यदि नियमित रूप से बीपी, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच नहीं कराई जा रही है, तो यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। समय रहते जोखिम की पहचान कर जीवनशैली में बदलाव करना हृदय रोग से बचाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने हृदयाघात के चेतावनी संकेतों को पहचानने पर भी जोर दिया। छाती के बीच में 15 मिनट से अधिक समय तक भारीपन, दबाव, जलन या दर्द, दर्द का बाएं हाथ, जबड़े, गर्दन या पीठ तक पहुंचना, अचानक सांस फूलना, अत्यधिक पसीना, चक्कर, घबराहट, बिना मेहनत के थकान या रात में सांस उखड़ना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। महिलाओं में उल्टी जैसा महसूस होना या असामान्य थकान भी चेतावनी संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों को केवल गैस समझकर घर पर इंतजार करना खतरनाक हो सकता है।
हार्ट अटैक की स्थिति में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए लक्षण दिखाई देते ही मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना चाहिए। उपचार में देरी कम करने से गंभीर परिणामों का जोखिम घटाने में मदद मिल सकती है।
बचाव को लेकर डॉ. वैष्णव ने संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और नशे से दूरी को सबसे महत्वपूर्ण बताया। हरी सब्जियां, मोटा अनाज और फल जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने, नमक की मात्रा सीमित रखने और अत्यधिक तला-भुना भोजन कम करने की सलाह दी गई है। बीड़ी, सिगरेट, गुटखा और गुड़ाखू को हृदय स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम वाला व्यवहार मानते हुए इससे दूरी बनाने पर जोर दिया गया।
नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है। स्वस्थ व्यक्ति रोज करीब 30 मिनट तेज चाल से पैदल चलने और सप्ताह में कम से कम पांच दिन सक्रिय रहने को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकता है। बढ़ता पेट और मोटापा भी हृदय संबंधी जोखिमों का संकेत हो सकता है।
स्वास्थ्य जांच को लेकर भी जागरूकता जरूरी है। 30 वर्ष के बाद नियमित रूप से रक्तचाप और ब्लड शुगर की जांच तथा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आगे की जांच कराना उपयोगी है। 40 वर्ष के बाद ईसीजी और लिपिड प्रोफाइल जैसी जांचों की जरूरत व्यक्ति के स्वास्थ्य एवं जोखिम कारकों के आधार पर डॉक्टर तय कर सकते हैं।
पर्याप्त नींद, तनाव कम करना, योग और प्राणायाम जैसी स्वस्थ आदतें भी जीवनशैली को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं। साथ ही प्रत्येक परिवार में कम से कम एक व्यक्ति को CPR की जानकारी होना आपात स्थिति में बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
विश्व हृदय दिवस का संदेश “Don’t Miss a Beat” यानी अपनी धड़कन को नजरअंदाज न करने का है। डॉ. पुष्पेंद्र वैष्णव का यह जागरूकता संदेश लोगों को समय पर जांच, स्वस्थ जीवनशैली और हृदयाघात के लक्षणों की तत्काल पहचान के लिए प्रेरित करता है। जरूरत है कि हर व्यक्ति अपने हृदय के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे और अपने परिवार व आसपास के लोगों को भी जागरूक करे, ताकि सारंगढ़-बिलाईगढ़ सहित पूरे छत्तीसगढ़ में हृदय रोगों के प्रति जागरूकता और बचाव की मुहिम को मजबूती मिल सके।

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