सारंगढ़। अंचल के वरिष्ठ शिक्षाविद, साहित्यकार एवं समाजसेवी रामलाल बरिहा के निधन से सारंगढ़ क्षेत्र सहित बिंझवार समाज में शोक की लहर दौड़ गई। 74 वर्षीय बरिहा जी पिछले कुछ वर्षों से लकवे के कारण अस्वस्थ चल रहे थे। उन्होंने अपने गृह ग्राम बैगीनडीह सालर में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही सामाजिक बंधुओं, परिजनों एवं शुभचिंतकों में शोक व्याप्त हो गया।
रामलाल बरिहा बिंझवार समाज सारंगढ़ राज के वरिष्ठ समाजसेवी एवं पूर्व सभापति रहे। समाज के अग्रज के रूप में उन्होंने लंबे समय तक सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई और समाज को संगठित करने तथा नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके सरल, सहज एवं मिलनसार व्यक्तित्व के कारण समाज में उनका विशेष सम्मान था।
शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भी बरिहा जी का उल्लेखनीय योगदान रहा। इसके साथ ही वे धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों से भी गहराई से जुड़े रहे। उन्हें मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर, कनकबीरा के मंदिर निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले व्यक्तित्व के रूप में भी याद किया जाता है।
उनका अंतिम संस्कार उनके गृह ग्राम बैगीनडीह सालर में किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु, परिजन, ग्रामवासी एवं क्षेत्र के लोग शामिल हुए और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
जिला पंचायत अध्यक्ष संजय पांडे ने रामलाल बरिहा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि रामलाल बरिहा का जाना केवल बिंझवार समाज ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि समाज और क्षेत्र के लिए बरिहा जी के योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
बिंझवार समाज सारंगढ़ राज के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि समाज ने अपना एक अनुभवी मार्गदर्शक और अग्रज खो दिया है। उनके निधन से उत्पन्न रिक्तता की भरपाई करना कठिन है।
समाज एवं क्षेत्रवासियों ने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।

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