सारंगढ़-बिलाईगढ़। जनपद पंचायत बिलाईगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत मोहतरा (स) और मुड़पार (स) में पंचायत निधि के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। दोनों पंचायतों में पदस्थ रहे सचिव छतराम साहू पर ग्रामीणों ने बिना कार्य कराए करीब 15 लाख रुपये आहरण करने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर ग्रामीणों ने जनपद पंचायत में शिकायत कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
मोहतरा (स) में 15वें वित्त की राशि पर उठे सवाल
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत मोहतरा (स) में 15वें वित्त की राशि से विभिन्न कार्यों के नाम पर करीब 7 लाख 83 हजार रुपये का आहरण किया गया। आरोप है कि मुरूम कार्य, जेसीबी कार्य, सड़क रिपेयरिंग, बोर-मोटर, स्टेशनरी, हार्डवेयर एवं निर्माण सामग्री सहित अलग-अलग मदों में बिल-वाउचर प्रस्तुत कर राशि निकाली गई, जबकि मौके पर कार्यों की वास्तविकता को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि का उपयोग कागजों में दर्शाया गया और वास्तविक धरातल पर अपेक्षित कार्य नहीं हुए। मामले में तत्कालीन सरपंच हरीशचंद्र और सचिव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
मुड़पार (स) पंचायत में भी करीब 7 लाख के आहरण का आरोप
इसी तरह ग्राम पंचायत मुड़पार (स) में भी करीब 7 लाख रुपये की राशि बिना कार्य कराए आहरण किए जाने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों पंचायतों में एक ही सचिव के कार्यकाल के दौरान बड़ी राशि के आहरण से वित्तीय व्यवस्था और पंचायत स्तर पर होने वाले सत्यापन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
भौतिक सत्यापन करने वाले अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल
ग्रामीणों ने पंचायतों में कराए गए कार्यों के भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि मौके पर कार्यों का सही ढंग से सत्यापन किया गया था तो कथित अनियमितताओं के बावजूद भुगतान और राशि आहरण कैसे हुआ? ग्रामीणों ने संबंधित इंजीनियर की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की है।
जनपद पंचायत बिलाईगढ़ कर रहा जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जनपद पंचायत बिलाईगढ़ के अधिकारियों द्वारा दोनों पंचायतों में हुए कथित आहरण और कार्यों की जांच की जा रही है। अब जांच के दौरान पंचायत के दस्तावेज, बिल-वाउचर, भुगतान अभिलेख, कार्यस्थल और भौतिक सत्यापन सहित अन्य रिकॉर्ड की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाए और यदि सरकारी राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित सरपंच, सचिव सहित जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करते हुए राशि की वसूली की जाए।
सरपंच-सचिव का पक्ष नहीं मिल सका
मामले में संबंधित सरपंच और सचिव का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन मोबाइल बंद होने के कारण उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।

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