सारंगढ़-बिलाईगढ़, 16 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार तत्कालीन प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी जोईधा राम डहेरिया को पदस्थ दायित्वों के निर्वहन में स्वेच्छाचारिता एवं गंभीर अनुशासनहीनता के मामले में निलंबित किया गया है। वहीं उनके स्थान पर लक्ष्मीनारायण पटेल को सारंगढ़-बिलाईगढ़ का प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया गया है।
शासन के आदेश के मुताबिक डहेरिया के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत विभागीय आदेश दिनांक 3 सितंबर 2026 के माध्यम से निलंबन की कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय संभागीय संयुक्त संचालक (शिक्षा), रायपुर निर्धारित किया गया है।

खाली पद पर लक्ष्मीनारायण पटेल की नियुक्ति
डहेरिया के निलंबन के बाद प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी का पद रिक्त हो गया था। शासन ने इस पद पर लक्ष्मीनारायण पटेल की नियुक्ति की है। पटेल वर्तमान में विकासखंड शिक्षा अधिकारी, खरसिया, जिला रायगढ़ के पद पर कार्यरत हैं तथा उनका मूल पद प्राचार्य है। उन्हें आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ का दायित्व सौंपा गया है।
शासन के अवर सचिव द्वारा जारी आदेश में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आदेश की प्रतिलिपि कलेक्टर रायगढ़ एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय तथा संबंधित शिक्षा अधिकारियों को भी प्रेषित की गई है।
नई जिम्मेदारी के साथ शिक्षा विभाग के सामने कई चुनौतियां
लक्ष्मीनारायण पटेल के सामने अब जिले की शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित करने और विभागीय कामकाज को प्रभावी बनाने की जिम्मेदारी होगी। जिले में सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक स्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता, विद्यार्थियों की उपस्थिति, परीक्षा परिणाम, निरीक्षण व्यवस्था तथा शासन की विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं के क्रियान्वयन पर विभाग की सक्रियता महत्वपूर्ण होगी।
प्रभारी डीईओ के रूप में उनके सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती मैदानी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को समझने और उसके आधार पर सुधार की कार्ययोजना तैयार करने की होगी। स्कूलों में नियमित निरीक्षण, शिक्षकों के साथ समन्वय और अधिकारियों की जवाबदेही को प्रभावी बनाने पर जोर दिए जाने की उम्मीद है।
अब परिणामों से तय होगी नई कार्यशैली की दिशा
नई प्रशासनिक व्यवस्था के बीच शिक्षा विभाग में अब निगाहें आने वाले समय के कामकाज और उसके परिणामों पर रहेंगी। स्कूलों की वास्तविक स्थिति को प्राथमिकता देने, निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत करने और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए ठोस कदम उठाना नई जिम्मेदारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
आने वाले समय में निरीक्षण से मिले निष्कर्ष, शिक्षकों का सहयोग, अधिकारियों की जवाबदेही और विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि जिले की शिक्षा व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ती है। विभागीय सक्रियता यदि नियमित समीक्षा और ठोस कार्ययोजना के साथ जुड़ती है, तो सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता को नई गति मिलने की संभावना है।
शिक्षा विभाग में जवाबदेही पर बढ़ा जोर
डहेरिया के निलंबन और नए प्रभारी डीईओ की नियुक्ति के बाद शिक्षा विभाग में प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। शासन के आदेश से यह स्पष्ट है कि विभागीय दायित्वों के निर्वहन में अनुशासन और निर्धारित नियमों का पालन महत्वपूर्ण है। अब नई व्यवस्था में अधिकारियों और मैदानी अमले के कामकाज की निगरानी किस तरह होती है, यह भी महत्वपूर्ण रहेगा।
फिलहाल सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की शिक्षा व्यवस्था की कमान लक्ष्मीनारायण पटेल के हाथों में है। अब उनके कार्यकाल में विभागीय सक्रियता, स्कूल निरीक्षण, शिक्षकों के साथ समन्वय और विद्यार्थियों के शैक्षणिक परिणामों को लेकर उठाए जाने वाले कदमों पर जिले की नजर रहेगी।

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