सारंगढ़। राजधानी के मुक्ताकाशी मंच में आयोजित चार दिवसीय सांस्कृतिक समारोह ‘पावस प्रसंग 2026’ का भव्य समापन सुर, लय, ताल और शास्त्रीय नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियों के साथ हुआ। अंतिम दिन पूरा मंच भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की अनुपम छटा से सजा रहा। कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा और हर प्रस्तुति के बाद तालियों की गूंज से कलाकारों का उत्साह बढ़ता रहा।
समापन समारोह में संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि संस्कृति विभाग द्वारा पावस ऋतु के उत्साह और उल्लास के बीच भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य की समृद्ध परंपरा को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से इस आयोजन का किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन प्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ प्रतिभावान कलाकारों को अपनी कला के प्रदर्शन के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराते हैं।

कथक और ओडिसी ने बांधा समां
समारोह के अंतिम दिन शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। विनीता त्रिपाठी ने कथक की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। इसके बाद कृष्ण कुमार पंडित और अशिका सिंघल ने कथक की मनोहारी प्रस्तुति से वातावरण को भाव और संगीत से भर दिया।
वहीं आर्या नंदे ने ओडिसी नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी, जबकि ज्योतिषी वैष्णव ने कथक की भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों की पदचाप, भाव-भंगिमाओं, ताल और लय का अद्भुत समन्वय मंच पर देखने को मिला।
तालियों की गूंज के साथ विदाई
चार दिनों तक चले इस सांस्कृतिक आयोजन में भारतीय शास्त्रीय कला की विविध विधाओं का मनोहारी प्रदर्शन देखने को मिला। अंतिम दिन कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समारोह में चार चांद लगा दिए। दर्शकों ने मुक्त कंठ से कलाकारों की सराहना करते हुए तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया। शास्त्रीय संगीत और नृत्य की अनुपम प्रस्तुतियों के बीच ‘पावस प्रसंग 2026’ का समापन हर्षोल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ हुआ।
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