सारंगढ़। अभामा महिला सम्मेलन सत्र 2026-28 के ‘संस्कार ही धरोहर’ संकल्प के तहत 25 अगस्त से 8 सितंबर तक राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े का आयोजन देशभर में व्यापक जनजागरूकता अभियान के रूप में किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष रेखा राठी, सचिव बबिता बगड़िया एवं प्रकल्प प्रमुख सरोज सुनालिया के नेतृत्व में चलाया गया यह अभियान 24 राज्यों तक पहुंचा, जहां सखियों ने नेत्रदान के महत्व को जन-जन तक पहुंचाते हुए इसे सामाजिक जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया।
अभियान के दौरान लोगों को नेत्रदान की प्रक्रिया, कॉर्निया ट्रांसप्लांट, आधुनिक नेत्र सुरक्षा तथा नियमित आई केयर के महत्व की जानकारी दी गई। जागरूकता अभियान को रचनात्मक स्वरूप देते हुए सखियों ने स्वरचित कविताओं और प्रेरणादायक स्लोगनों के माध्यम से लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित किया। इन कविताओं और संदेशों को पोस्टर एवं अन्य प्रचार सामग्री के जरिए आमजन तक पहुंचाया गया।
प्रकल्प प्रमुख सरोज सुनालिया ने बताया कि जनजागरूकता के लिए नेत्रदान क्यूआर कोड युक्त शपथ पोस्टर, नुक्कड़ नाटक, साइकिल रैली, पोस्टर झांकी, दीवार पेंटिंग, थीम आधारित मेहंदी एवं टैटू, स्टैंडी, कैप और थैले जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं। इसके साथ ही गमले एवं पौधों का वितरण कर पर्यावरण संरक्षण के संदेश को भी अभियान से जोड़ा गया। नेत्रदान का संकल्प लेने वाले परिवारों को सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
देश के विभिन्न क्षेत्रों में नेत्र परीक्षण शिविर एवं ऑपरेशन कैंप आयोजित किए गए, जहां लोगों की आंखों की जांच के साथ नेत्रदान के संकल्प फॉर्म भी भरवाए गए। अभियान को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और प्रमुख न्यूज मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार मिला, जिससे नेत्रदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।
अभियान के समापन अवसर पर 8 सितंबर को नेत्रदान विषय पर विशेष ऑनलाइन क्विज का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से बड़ी संख्या में बहनों ने भाग लेकर नेत्रदान के महत्व, नेत्र स्वास्थ्य और कॉर्निया प्रत्यारोपण से जुड़ी जानकारी को परखा। अभामा महिला सम्मेलन के इस अभियान ने समाज में यह संदेश पहुंचाया कि मृत्यु के बाद भी नेत्रदान के माध्यम से किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी लाई जा सकती है और एक व्यक्ति का संकल्प किसी दूसरे के जीवन को नई दिशा दे सकता है।

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