सारंगढ़-बिलाईगढ़, 30 अगस्त 2026। देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 अब लागू है। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 की जगह लेने वाले इस नए कानून में अधिकांश पुराने अपराधों को बरकरार रखते हुए कई नए प्रावधान जोड़े गए हैं। कानून की सबसे बड़ी विशेषताओं में सामुदायिक सेवा को सजा के रूप में शामिल करना, राजद्रोह की जगह देश की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ कृत्यों के लिए नया प्रावधान, आतंकवाद और संगठित अपराध को स्पष्ट रूप से अपराध की श्रेणी में शामिल करना प्रमुख हैं।

राजद्रोह की जगह नया प्रावधान
बीएनएस में पुराने राजद्रोह कानून को समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने, अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने, सशस्त्र विद्रोह या विध्वंसक गतिविधियों को उकसाने जैसे कृत्यों को दंडनीय बनाया गया है। इसमें शब्दों, संकेतों, इलेक्ट्रॉनिक संचार और वित्तीय साधनों के उपयोग को भी शामिल किया गया है।
आतंकवाद और संगठित अपराध पर कड़ी कार्रवाई
बीएनएस में आतंकवाद को अलग और स्पष्ट अपराध के रूप में शामिल किया गया है। ऐसा कृत्य, जिसका उद्देश्य देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को खतरे में डालना, आम जनता में भय पैदा करना या सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ना हो, आतंकवाद की श्रेणी में आ सकता है।
यदि आतंकवादी कृत्य के कारण किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो मृत्युदंड या आजीवन कारावास और जुर्माने तक का प्रावधान है। अन्य गंभीर मामलों में भी लंबी अवधि के कारावास और भारी जुर्माने की व्यवस्था की गई है।
इसी तरह अपहरण, जबरन वसूली, सुपारी लेकर हत्या, भूमि हड़पना, वित्तीय घोटाले और साइबर अपराध जैसे कृत्य यदि किसी संगठित आपराधिक गिरोह के माध्यम से किए जाते हैं, तो उन्हें संगठित अपराध माना जाएगा। इसके लिए भी बेहद कठोर सजा का प्रावधान किया गया है।
भीड़ हिंसा और मॉब लिंचिंग पर विशेष प्रावधान
जाति, नस्ल, लिंग, भाषा या व्यक्तिगत आस्था जैसे आधारों पर पांच या उससे अधिक लोगों के समूह द्वारा हत्या या गंभीर चोट पहुंचाने को बीएनएस में विशेष अपराध के रूप में शामिल किया गया है। ऐसे मामलों में दोषियों को कम से कम सात वर्ष की सजा से लेकर आजीवन कारावास अथवा मृत्युदंड तक दिया जा सकता है।
छोटे संगठित अपराध भी कानून के दायरे में
वाहन चोरी, जेबकतरी, सार्वजनिक परीक्षा के प्रश्नपत्रों की बिक्री और गिरोह के माध्यम से किए जाने वाले अन्य छोटे अपराधों को भी बीएनएस में संगठित अपराध की श्रेणी में लाया गया है। ऐसे मामलों में एक वर्ष से लेकर सात वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान हो सकता है।
महिलाओं के खिलाफ अपराधों में भी बदलाव
बीएनएस ने बलात्कार, पीछा करना, ताक-झांक और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसे अपराधों से संबंधित प्रावधानों को बरकरार रखा है। साथ ही छल या झूठे वादे के माध्यम से महिला से यौन संबंध बनाने के संबंध में भी नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। सामूहिक बलात्कार से जुड़े कुछ मामलों में पीड़िता की आयु सीमा को 16 से बढ़ाकर 18 वर्ष किया गया है।
सामुदायिक सेवा भी बनेगी सजा
नए कानून में कुछ अपराधों के लिए कारावास और जुर्माने के साथ-साथ सामुदायिक सेवा को भी सजा के विकल्प के रूप में शामिल किया गया है। इसे आपराधिक न्याय व्यवस्था में सुधारात्मक और समाजोपयोगी दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।
मानसिक बीमारी और आपराधिक जिम्मेदारी पर बहस
बीएनएस में मानसिक अस्वस्थता से संबंधित प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है। ‘अस्वस्थ मन’ की जगह ‘मानसिक बीमारी’ शब्द का उपयोग किया गया है। हालांकि मानसिक बीमारी की परिभाषा और मानसिक मंदता से संबंधित मामलों को लेकर विशेषज्ञों और कानूनविदों के बीच बहस बनी हुई है।
बच्चों की आपराधिक जिम्मेदारी की उम्र
बीएनएस में सात वर्ष से कम आयु के बच्चे द्वारा किए गए कृत्य को अपराध नहीं माना जाएगा। वहीं बच्चे की समझ और परिपक्वता के आधार पर कुछ मामलों में यह सीमा 12 वर्ष तक लागू हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय मानकों और विभिन्न देशों की व्यवस्था की तुलना में इस प्रावधान पर भी चर्चा जारी है।
कुछ प्रावधानों को लेकर सवाल भी
नए कानून में आतंकवाद की व्यापक परिभाषा, छोटे संगठित अपराध की स्पष्टता, विशेष कानूनों के साथ कुछ अपराधों का दोहराव और अलग-अलग कानूनों के तहत एक ही अपराध के लिए अलग दंड की संभावनाओं जैसे मुद्दों पर कानूनी विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि इन प्रावधानों की व्याख्या और क्रियान्वयन में स्पष्टता बेहद महत्वपूर्ण होगी।
कुल मिलाकर भारतीय न्याय संहिता 2023 देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में एक व्यापक बदलाव है। आईपीसी के कई मूल प्रावधानों को बरकरार रखते हुए इसमें आधुनिक अपराधों, साइबर अपराध, संगठित अपराध और आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए नए कानून जोड़े गए हैं। अब आने वाले समय में न्यायालयों के फैसले और कानून का व्यवहारिक क्रियान्वयन तय करेगा कि यह नया कानून आम नागरिकों के लिए न्याय को कितना सरल, प्रभावी और सुलभ बना पाता है।
- डिजिटल अरेस्ट से सावधान! पुलिस ने शुरू किया विशेष अभियान… - August 30, 2026
- बीएनएस 2023: बदला कानून, बदली सजा की तस्वीर! - August 30, 2026
- UCC पर मुस्लिम समाज की बड़ी बैठक 1 सितंबर को, रायपुर में जुटेंगे बुद्धिजीवी… - August 30, 2026
