बरमकेला। सरकारी कार्यालय जनता की सुविधा और उनके कामों को आसान बनाने के लिए होते हैं, लेकिन जनपद पंचायत बरमकेला में इन दिनों एक ऐसी व्यवस्था सामने आई है, जिसने पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां सवाल केवल इतना था कि जनपद पंचायत की अलग-अलग शाखाओं का प्रभारी कौन है, लेकिन इस सामान्य जानकारी को हासिल करना भी मानो किसी सरकारी राज से पर्दा उठाने जैसा हो गया!
मामला तब सामने आया, जब पत्रकार देवराज दीपक ने जनपद पंचायत बरमकेला कार्यालय में आवास शाखा, पेंशन शाखा, मनरेगा सहित अन्य शाखाओं के प्रभारी अधिकारी-कर्मचारियों के नाम और उनकी जिम्मेदारियों के संबंध में जानकारी मांगी। बताया जा रहा है कि मौखिक रूप से जानकारी देने के बजाय लिखित आवेदन प्रस्तुत करने की बात कही गई।
अब सवाल यह है कि आखिर किसी शाखा का प्रभारी कौन है, यह जानने के लिए भी आवेदन देना जरूरी क्यों? क्या सरकारी कार्यालय में अधिकारी-कर्मचारियों के नाम और उनकी शाखावार जिम्मेदारियां भी अब ‘गोपनीय जानकारी’ की श्रेणी में शामिल हो गई हैं?

जनता किसके पास जाए, जब नाम ही न बताया जाए?
आम नागरिक अपने जरूरी कामों को लेकर जनपद कार्यालय पहुंचता है। किसी को आवास से संबंधित जानकारी चाहिए, किसी को पेंशन की समस्या है, कोई मनरेगा के भुगतान या रोजगार से जुड़ा मामला लेकर आता है तो कोई पंचायत से संबंधित कार्य के लिए। ऐसे में सबसे पहला सवाल यही होता है—“साहब, हमारा काम किस शाखा में होगा और किस अधिकारी से मिलना है?”
लेकिन यदि इस सामान्य जानकारी के लिए भी पहले आवेदन लिखने की प्रक्रिया अपनानी पड़े, तो आमजन की परेशानी बढ़ना तय है। सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर कार्यालय में सूचना और नागरिक मार्गदर्शन की व्यवस्था किसके लिए है?
पत्रकार पूछे तो भी आवेदन, आम आदमी पूछे तो भी आवेदन!
जनहित से जुड़ी सामान्य प्रशासनिक जानकारी मांगने वाले पत्रकार को भी यदि लिखित आवेदन देने के लिए कहा जा रहा है, तो आम नागरिकों को किस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता होगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
क्या अब सरकारी कार्यालय में यह पूछना भी मुश्किल हो गया है कि आवास शाखा का प्रभारी कौन है? पेंशन शाखा किसके पास है? मनरेगा की जिम्मेदारी किस अधिकारी या कर्मचारी के पास है?
‘अंधेर नगरी, चौपट राजा’ जैसी व्यवस्था तो नहीं?
सरकारी कार्यालयों की व्यवस्था का उद्देश्य जनता को भटकने से बचाना और उनके कार्यों को सरल बनाना होना चाहिए। शाखावार जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी कार्यालय के सूचना पटल पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए तो किसी भी नागरिक को इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
लेकिन यदि सामान्य जानकारी को भी आवेदन की प्रक्रिया में उलझाया जाएगा, तो पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जनपद पंचायत बरमकेला के जिम्मेदार अधिकारियों को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर—
क्या शाखा प्रभारियों के नाम सार्वजनिक रूप से बताने पर कोई प्रतिबंध है?
क्या सामान्य जानकारी के लिए भी लिखित आवेदन देना अनिवार्य है?
क्या शाखावार प्रभारी अधिकारियों-कर्मचारियों की सूची कार्यालय में उपलब्ध है?
और यदि सूची उपलब्ध है, तो उसे सूचना पटल पर सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
मैडम जी, सवाल छोटा है—जवाब भी सीधा चाहिए!
जनता और पत्रकारों को कार्यालयीन व्यवस्था की सामान्य जानकारी के लिए आवेदन और इंतजार की प्रक्रिया में उलझाने के बजाय जनपद कार्यालय में सभी शाखाओं और उनके प्रभारी अधिकारियों-कर्मचारियों की सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जानी चाहिए। इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी और आमजन को अपने काम के लिए सही अधिकारी तक पहुंचने में आसानी होगी।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जनपद पंचायत बरमकेला के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं। क्या शाखावार प्रभारी अधिकारियों की सूची सार्वजनिक की जाएगी या फिर बरमकेला जनपद में “नाम जानना है तो पहले आवेदन दीजिए” वाली व्यवस्था ही आगे भी जारी रहेगी?
आखिर सवाल सीधा है—जनपद पंचायत की व्यवस्था जनता की सुविधा के लिए है या फिर जनता को व्यवस्था के चक्कर काटने के लिए?
- दिव्यांगजनों की सेवा को नई उड़ान, सिलियारी में कल्याण समिति का गठन… - August 28, 2026
- नाम पूछो तो आवेदन दो! बरमकेला जनपद की ‘गोपनीय’ व्यवस्था पर सवाल… - August 28, 2026
- खेलो इंडिया संवाद से गूंजा डोंगरीपाली, युवाओं में खेलों का जोश…. - August 28, 2026
