सारंगढ़-बिलाईगढ़, 23 अगस्त 2026/ जिले के लिए गर्व और गौरव का क्षण है। राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान 2026 के लिए सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की नवाचारी शिक्षिका सुनीता यादव का छत्तीसगढ़ से एकमात्र चयन किया गया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर उन्हें नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में प्रशस्ति पत्र, शाल एवं सम्मान राशि सहित सम्मानित किया जाएगा। उनकी इस उपलब्धि से न केवल जिले, बल्कि पूरे प्रदेश के शिक्षा जगत में हर्ष का माहौल है।
बरमकेला विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला खिचरी में पदस्थ शिक्षिका सुनीता यादव शिक्षा के क्षेत्र में अपने नवाचारों और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। इससे पूर्व वर्ष 2025 में साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनके विशेष योगदान के लिए उन्हें पंडित मुकुटधर पांडे स्मृति अलंकरण से नवाजा जा चुका है। वहीं वर्ष 2024 में उन्हें राज्य शिक्षक सम्मान भी प्राप्त हुआ था।

अंतिम पंक्ति के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने का अनूठा प्रयास
सुनीता यादव एक नवाचारी और संवेदनशील शिक्षिका के रूप में जानी जाती हैं। वे विशेष रूप से कक्षा के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास करती हैं। साहित्य को शिक्षा से जोड़कर बच्चों को अनुभव आधारित शिक्षा प्रदान करने की दिशा में उनका कार्य सराहनीय है।
बच्चों के बेहतर पोषण और स्वास्थ्य के लिए वे अपने स्वयं के व्यय से नियमित रूप से दूध वितरण भी करती हैं। साथ ही अधिक से अधिक न्योता भोजन के माध्यम से बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए भी सक्रिय रूप से प्रयासरत रहती हैं।
शोध, तकनीक और रचनात्मक शिक्षण का शानदार संगम
सुनीता यादव जिले की पहली महिला शिक्षिका हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में सारंगढ़-बिलाईगढ़ के प्राथमिक विद्यालयों में आए परिवर्तनों पर शोध पत्र लिखा है। उन्होंने बिलासपुर जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय तिलकडीह में आदिवासी बच्चों के लिए निःशुल्क अध्यापन एवं समर कैंप का संचालन कर शिक्षा के प्रति अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता का भी परिचय दिया।
आईसीटी आधारित शिक्षा को बढ़ावा देते हुए वे बच्चों को दीक्षा एप और स्टोरी वीवर जैसे डिजिटल माध्यमों से पढ़ाती हैं। बच्चों को रुचिकर ढंग से शिक्षा देने के लिए वे लघु फिल्मों का निर्माण करती हैं, जिनमें स्वयं और बच्चे अभिनय करते हैं। इसके अलावा ऑडियो बुक, पॉडकास्ट, ब्लॉगिंग, रिपोर्टिंग, रोजगारमूलक गतिविधियों और स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को आधुनिक एवं व्यवहारिक शिक्षा प्रदान की जा रही है।
उनके इन्हीं नवाचारों, शिक्षा के प्रति समर्पण और बच्चों के हित में किए गए उल्लेखनीय कार्यों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया है।
मेधावी छात्रा से राष्ट्रीय सम्मान तक का प्रेरक सफर
शिक्षिका सुनीता यादव का जन्म महासमुंद जिले के सांकरा-जोंक निवासी प्रसिद्ध एवं उत्कृष्ट शिक्षक पठान नाग यादव और रूपा यादव के परिवार में हुआ। वे छात्र जीवन से ही मेधावी रही हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सांकरा-जोंक, जिला महासमुंद में हुई।
उन्होंने कला विषय में स्नातक की पढ़ाई कला महाविद्यालय पिथौरा से की तथा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद पंडित सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय, बिलासपुर से बीएड की शिक्षा पूर्ण की।
उनका विवाह बरमकेला के व्यवसायी नंदकुमार यादव से हुआ। उनकी एकमात्र पुत्री सृजना यादव गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में जर्नलिज्म एवं मास मीडिया कम्युनिकेशन की छात्रा हैं।
राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान के लिए छत्तीसगढ़ से एकमात्र चयन के बाद सुनीता यादव की यह उपलब्धि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई है। शिक्षा के क्षेत्र में उनका समर्पण, नवाचार और बच्चों के प्रति संवेदनशीलता निश्चित रूप से अन्य शिक्षकों के लिए भी अनुकरणीय उदाहरण है।
सुनीता यादव की सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि समर्पण, नवाचार और सच्ची सेवा भावना से एक शिक्षक समाज और राष्ट्र के भविष्य को नई दिशा दे सकता है।
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