सारंगढ़-बिलाईगढ़। कोसीर तहसील के ग्राम भाठागांव से इंसानियत, संवेदना और सेवा की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। 66 वर्षीय जगजीवन सुमन, पिता अवधराम सुमन, लंबे समय से लकवे की बीमारी के कारण बिस्तर पर हैं। उनके परिवार में केवल 70 वर्षीय पत्नी तारा बाई हैं। दोनों बुजुर्ग होने के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं और परिवार में कोई भी ऐसा सदस्य नहीं है, जो नियमित रूप से कमाई कर सके।
आर्थिक तंगी ने बुजुर्ग दंपत्ति की मुश्किलें और बढ़ा दी थीं। आय का कोई स्थायी साधन नहीं होने के कारण उन्हें जीवन-यापन और दो वक्त की रोटी के लिए भी दूसरों के सामने हाथ फैलाने की मजबूरी थी। पूरे महीने पत्नी को मिलने वाली महज 500 रुपये की वृद्धावस्था पेंशन और शासन से प्राप्त 20 किलो चावल के सहारे किसी तरह घर का चूल्हा जलता था। बीमारी, इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों के सामने यह सहायता बेहद कम पड़ रही थी।

मुश्किल वक्त में ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ बनी सहारा
ऐसे कठिन समय में संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित बताई गई ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के माध्यम से इस बुजुर्ग दंपत्ति तक राहत सामग्री पहुंचाई गई। मुहिम से जुड़े लोगों के अनुसार इसका उद्देश्य जरूरतमंद और असहाय परिवारों को आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराकर उन्हें सहारा देना है।
इसी पहल के तहत 7 अगस्त 2026 को जगजीवन सुमन के घर पहुंचकर परिवार को राशन, दैनिक उपयोग की वस्तुएं, कपड़े और घरेलू जरूरत का सामान उपलब्ध कराया गया। राहत सामग्री मिलने के बाद बुजुर्ग दंपत्ति के चेहरे पर लंबे समय बाद राहत और उम्मीद की झलक दिखाई दी।
राशन से लेकर गैस चूल्हे तक, जरूरत का सामान पहुंचाया
राहत किट में परिवार की दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बड़ी संख्या में सामग्री दी गई। इसमें करीब 15 से 25 किलो पतला चावल, 3 किलो आटा, ढाई किलो प्याज, ढाई किलो आलू, 1 लीटर सरसों तेल, मसाले, नमक, 2 किलो चीनी, चाय, दूध पाउडर, अचार, चार प्रकार की दाल, बेसन और दलिया सहित अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री शामिल रही।
इसके अलावा परिवार के लिए दो-दो जोड़ी कपड़े, दो साड़ी, पेटीकोट व ब्लाउज, दो टी-शर्ट, दो बरमूडा, दो चादर, प्लास्टिक टब, बाल्टी, मग, चावल बनाने के बर्तन, दो जोड़ी चप्पल, खाट के लिए नेवारा, मच्छरदानी, गैस चूल्हा सेट और गैस सिलेंडर सहित घरेलू उपयोग की सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।
बुजुर्ग दंपत्ति के लिए राहत से बढ़कर सम्मान की पहल
बीमारी और ढलती उम्र के कारण बेबसी का जीवन जी रहे इस बुजुर्ग दंपत्ति के लिए यह सहायता केवल राशन और घरेलू सामान तक सीमित नहीं रही। जरूरत के समय किसी का हाथ थामना और उन्हें यह एहसास कराना कि वे समाज में अकेले नहीं हैं, इस पहल का मानवीय पक्ष सामने आया।
लाभार्थी जगजीवन सुमन ने भावुक होकर कहा, “भगवान संत रामपाल जी महाराज हमारे परिवार के लिए सहारा बनकर आए हैं। मैं जीवन भर उनका गुणगान करता रहूंगा।”
वहीं ग्राम सरपंच धनश्याम सुमन ने कहा, “संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम गरीब परिवारों के लिए बहुत अच्छी पहल है। हम अपने ग्राम और पंचायत की ओर से उनका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।”
भाठागांव की यह घटना बताती है कि जरूरतमंद परिवारों तक समय पर पहुंचने वाली छोटी-सी मदद भी उनके जीवन में बड़ी उम्मीद पैदा कर सकती है। बुजुर्ग दंपत्ति के लिए पहुंचाई गई यह राहत सामग्री उनके कठिन दिनों में सहारा बनने के साथ ही समाज में सेवा, करुणा और मानवीय संवेदना का संदेश भी दे रही है।
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