सारंगढ़। राष्ट्रीय राजमार्ग और प्रमुख सड़कों पर रात के समय आवारा मवेशियों के जमावड़े से होने वाली गंभीर सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक अनुकरणीय पहल सामने आई है। देर रात करीब 1 बजे पत्रकार दिनेश जोल्हे और पत्रकार सुनील टंडन ने सड़क पर उतरकर विचरण कर रहे आवारा मवेशियों को रेडियम बेल्ट पहनाया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य रात के अंधेरे में दूर से ही वाहन चालकों को सड़क पर बैठे मवेशी स्पष्ट दिखाई दें, ताकि संभावित हादसों को टाला जा सके।
रात के समय राजमार्गों से गुजरने वाले तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से कई बार बेजुबान मवेशी अकाल मौत के शिकार हो जाते हैं, वहीं वाहन चालकों और यात्रियों की जान पर भी भारी जोखिम बना रहता है। विशेषकर दोपहिया चालकों के लिए अंधेरे में अचानक मवेशी सामने आना बेहद खतरनाक साबित होता है। वाहनों की हेडलाइट पड़ते ही चमकने वाले इन रेडियम बेल्टों से अब दूर से ही मवेशियों की मौजूदगी का संकेत मिल सकेगा, जिससे चालकों को गति नियंत्रित करने का पर्याप्त समय मिलेगा।
पत्रकारों ने रात 1 बजे बिना मवेशियों को कोई नुकसान पहुंचाए बेहद सावधानीपूर्वक बेल्ट पहनाने का काम पूरा किया। इस सराहनीय कार्य में जिला पशु विभाग का भी सहयोग प्राप्त हुआ। हालांकि जानकारों का मानना है कि केवल रेडियम बेल्ट लगाने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है; इसके लिए सुरक्षित गौ-आश्रय, सतत निगरानी और पशु प्रबंधन जैसे ठोस कदम जरूरी हैं। पत्रकारों ने आम जनता और वाहन चालकों से भी अपील की है कि वे रात के वक्त नियंत्रित गति से वाहन चलाएं। समाज को जागरूक करने वाली इस पहल ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन का दायित्व नहीं, बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।






