सारंगढ़-बिलाईगढ़। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुष्पेंद्र वैष्णव के मार्गदर्शन में जिले में कन्या भ्रूण हत्या पर रोक, बेटी बचाओ अभियान और समान लिंगानुपात को मजबूत बनाने की दिशा में प्रभावी पहल लगातार जारी है। इसी कड़ी में शुक्रवार को रानीसागर स्थित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में गर्भधारण पूर्व एवं प्रसवपूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) जिला सलाहकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में समिति के सभी सदस्यों ने भाग लिया और पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. पुष्पेंद्र वैष्णव ने स्पष्ट किया कि गर्भ में पल रहे शिशु का अवैध लिंग परीक्षण करना या कराना गंभीर अपराध है तथा ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वाले अस्पतालों और नर्सिंग होम के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित संस्थान की वैधता समाप्त करने की कार्रवाई जिला कलेक्टर एवं जिला सलाहकार समिति के माध्यम से की जाएगी।
बैठक में जिले में प्रस्तावित चार नए सोनोग्राफी केंद्रों के लाइसेंस संबंधी दस्तावेजों का भी परीक्षण किया गया। सभी आवश्यक दस्तावेजों के अवलोकन के बाद समिति के सदस्यों ने लिखित अनुमति प्रदान की।
बैठक में पीसीपीएनडीटी एक्ट-1994 के तहत लिंग परीक्षण अथवा लिंग चयन से संबंधित किसी भी प्रकार के विज्ञापन पर पूर्ण प्रतिबंध की जानकारी दी गई। अधिनियम के अनुसार ऐसे विज्ञापन जारी, प्रकाशित या प्रसारित करने पर पहली बार तीन वर्ष तक का कारावास एवं ₹10 हजार तक जुर्माना तथा पुनः अपराध करने पर पांच वर्ष तक की सजा, ₹50 हजार तक जुर्माना और संबंधित अस्पताल या क्लिनिक का पंजीयन निलंबित अथवा निरस्त किया जा सकता है।
डॉ. वैष्णव ने आम नागरिकों से अपील की कि यदि कहीं भी गर्भ में शिशु के लिंग परीक्षण जैसी अवैध गतिविधि की जानकारी मिले तो उसकी शिकायत नजदीकी थाना, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम अथवा जिला सलाहकार समिति के सदस्यों से करें। शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि समाज में बेटी और बेटे के प्रति समान सोच विकसित करना तथा कन्या भ्रूण हत्या पर पूर्ण रोक लगाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।





